Chhapra Gandak Dam Repair: सारण जिले के मकेर प्रखंड में गंडक नदी के सारण मुख्य तटबंध के टूटे हिस्सों की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों और विभागीय अधिकारियों के बीच विवाद सामने आया है। घटना के करीब सात दिन बाद गंडक विभाग के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम हैजलपुर पहुंची थी। टीम में चीफ इंजीनियर, एससी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और संवेदक शामिल थे। अधिकारियों के पहुंचते ही ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य को लेकर विरोध शुरू कर दिया।
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बालू से मरम्मत का ग्रामीणों ने किया विरोध

ग्रामीणों ने बांध की मरम्मत बालू के पैकेट से किए जाने पर आपत्ति जताई। ग्रामीण अरुण सिंह, सुनील सिंह, गोलू सिंह, सुमन सिंह, दिनेश राय, सीटू सिंह, आकाश कुमार, सुनोद साह, लगन साह और अभिनेष सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि बांध की मरम्मत में बालू का इस्तेमाल नहीं किया जाए। उनका आरोप है कि पहले भी बांध की मरम्मत के दौरान मिट्टी की जगह बालू का इस्तेमाल किया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि इसी वजह से बांध कमजोर हुआ और बाद में टूट गया।
नारेबाजी के बाद अधिकारियों को लौटना पड़ा
मरम्मत को लेकर ग्रामीणों का विरोध इतना बढ़ गया कि अधिकारियों को मौके से वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए बालू से मरम्मत का विरोध किया। बताया गया कि गंडक विभाग के अध्यक्ष के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने एई समेत कई अन्य अधिकारियों को भी गांव से वापस भेज दिया था। ग्रामीणों के विरोध के कारण मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बाद में पूर्व मुखिया धर्मेंद्र सिंह उर्फ खेदु सिंह की पहल पर ग्रामीणों को शांत कराया गया।
मिट्टी से मजबूत मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने फिलहाल बांध के टूटे हिस्से पर बांस से घेरा लगाकर अस्थायी व्यवस्था करने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने बालू से बांध की मरम्मत करने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाने की बात कही। ग्रामीणों की मांग है कि टूटे हुए तटबंध की मरम्मत मिट्टी से और मजबूती के साथ की जाए, ताकि भविष्य में दोबारा बांध टूटने का खतरा न रहे।
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बांध टूटने से कई प्रखंडों में मची थी तबाही
गौरतलब है कि मकेर प्रखंड के बाघाकोल पंचायत स्थित हैजलपुर और बाघाकोल में गंडक नदी का सारण मुख्य तटबंध पिछले बुधवार सुबह करीब 7 से 8 बजे के बीच टूट गया था। तटबंध टूटने के बाद मकेर, परसा, दरियापुर और अमनौर प्रखंड के दर्जनों गांव प्रभावित हुए। बड़ी मात्रा में फसल जलमग्न हुई और कई परिवारों के सामने विस्थापन की स्थिति पैदा हो गई।






















