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Friday, July 31, 2026

धनबाद में अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान की पहली बैठक…

धनबाद: जिले की प्रमुख नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा समग्र जल प्रबंधन के उद्देश्य से अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान के अंतर्गत गठित मल्टी स्टेकहोल्डर्स वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक आज समाहरणालय के सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन एवं नगर आयुक्त आशीष गंगवार की सह अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में दामोदर, कतरी सहित जिले की अन्य प्रमुख नदियों एवं जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति तथा उनके संरक्षण और पुनर्जीवन के संभावित उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान शहरी नदी प्रबंधन योजना के विभिन्न आयामों पर व्यापक चर्चा की गई। यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान चरण में विभिन्न संभावित पहलुओं, उपायों और कार्यों पर प्रारंभिक विचार-मंथन किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में एक व्यवहारिक एवं समन्वित कार्ययोजना तैयार की जा सके। इस क्रम में नदी संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, नदी तट विकास, जल प्रबंधन तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई संभावित उपायों पर चर्चा हुई।

उपायुक्त ने कहा कि शहरी नदी प्रबंधन योजना को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए कार्यों की संभावित समयसीमा तथा प्राथमिकताओं पर विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन कार्यों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है, उनकी पहचान की जाए। साथ ही कुछ चयनित स्थलों पर पायलट स्तर पर कार्य प्रारंभ करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है, जबकि अन्य स्थलों का सर्वेक्षण और अध्ययन समानांतर रूप से जारी रखा जा सकता है।

बैठक में नदियों के आसपास संभावित अतिक्रमण, ओवर बर्डन (ओबी) डंपिंग तथा अन्य पर्यावरणीय दबावों की पहचान करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही नदी तटों पर हरित क्षेत्र विकसित करने, व्यापक स्तर पर पौधारोपण करने, पार्क एवं संभावित पर्यटन स्थलों के विकास जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में यह भी सुझाव सामने आया कि नदी प्रदूषण को रोकने और नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय समुदायों, सामाजिक संगठनों तथा स्कूली बच्चों को अभियान से जोड़ा जा सकता है। जल शोधन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जल उपचार संयंत्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

बैठक के दौरान दामोदर बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि श्री अरुण कुमार राय ने मटकुरिया तथा मनईटांड नालों में प्रदूषण की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट किया और बताया कि इन दोनों नालों का प्रदूषित जल अंततः दामोदर नदी में जाकर मिलता है। इस संदर्भ में संबंधित नालों की स्थिति का सर्वेक्षण कर संभावित सुधारात्मक उपायों पर विचार करने की बात कही गई।

चर्चा के दौरान नदियों और जल निकायों की निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न स्थानों पर संभावित चेक-पॉइंट्स स्थापित करने तथा पुलों के पिलरों पर वाटर मार्क लगाए जाने जैसे सुझाव भी सामने आए, जिससे मानसून के दौरान जलस्तर और बहाव के आकलन में सहायता मिल सके और भविष्य की योजनाओं के लिए उपयोगी डेटा उपलब्ध हो सके।

जल संरक्षण के संदर्भ में यह भी सुझाव दिया गया कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों, सरकारी भवनों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों में एरेटर युक्त नलों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सकता है। एरेटर नल पानी की धारा को कई छोटी धाराओं में विभाजित कर दबाव बनाए रखते हुए जल प्रवाह की दर को कम कर देता है, जिससे पानी की खपत लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक कम की जा सकती है और जल की अनावश्यक बर्बादी को रोका जा सकता है।

बैठक के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि जिले में जल की गुणवत्ता में सुधार तथा औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए एक समेकित जल प्रबंधन दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस दिशा में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड तथा हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड जैसे औद्योगिक संस्थानों की सहभागिता पर भी विचार किया गया, जबकि भविष्य में दामोदर वैली कॉरपोरेशन सहित अन्य संस्थानों को भी इस पहल से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

जल गुणवत्ता की वैज्ञानिक निगरानी के लिए आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा सिम्फर के वैज्ञानिकों की तकनीकी सहायता लेने का भी सुझाव सामने आया, ताकि जल गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके। बेहतर योजना निर्माण के लिए पिछले वर्षों के जल संबंधी आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

बैठक में यह सहमति व्यक्त की गई कि विभिन्न विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों तथा नागरिक समाज के सहयोग से भविष्य में एक प्रभावी अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे जिले की नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण, जल गुणवत्ता में सुधार तथा सतत शहरी विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, नगर आयुक्त आशीष गंगवार, सुडा के उप निदेशक सुमित कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, अपर नगर आयुक्त कमलेश्वर नारायण, सहायक नगर आयुक्त प्रसून कौशिक, आईआईटी (आईएसएम), सूडा, बीआईटी सिंदरी के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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