झारखंड: देवरी प्रखंड के बरवाबाद में स्थित मचवार बाबा का मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। लोग यहां इच्छित कामना की पूर्ति हेतु मन्नत मांगने आते हैं और मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात विभिन्न तरह के बलि का प्रावधान है जिन्हें अर्पित किया जाता है। इस बाबत पूजा करवा रहे स्थानीय पंडित संतोष उपाध्याय ने शुक्रवार को बताया कि मचवार बाबा को लेकर कई अनंत कथाएं हैं लेकिन मुख्य बात यह है कि जो भी याचक यहां आते हैं उनकी कामना अवश्य पूरी होती है।
वहीं पंडित संतोष उपाध्याय ने बताया कि लोग अपनी समस्याओं से निजात हेतु वन देवता मचवार बाबा के दरबार से मन्नत मांगते हैं और जब उनकी मुराद पूरी होती है तो वे बलि देते हैं। कुछ लोग मुर्गे की तो कुछ बकरे की तथा कुछ सूअर की बलि देते हैं। इस बाबत पंडित संतोष उपाध्याय ने बताया कि पुजारी के परिवार से वे पांचवीं पीढ़ी के हैं। दंत कथाओं के मुताबिक बैरिया के टिकैत गिरजा प्रसाद सिंह असाध्य रोग से पीड़ित हो गए। उन्हें स्वप्न मिला कि मचवार बाबा के दरबार में जाने से ही वे स्वस्थ होंगे। वे मचवार बाबा के दरबार में आए और स्वास्थ्य की कामना की। घर वापस लौटने के पश्चात उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे सुधरने लगा और वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए। पहली बार उन्होंने ही फूल पूजा के तहत मुर्गे, सूअर तथा बकरे की बलि दी तब से यह परंपरा आज भी कायम है। प्रत्येक सोमवार बुधवार तथा शुक्रवार को उनकी पूजा होती है।






















