Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
Highlights:
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:14 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर की सुबह 7:54 बजे समाप्त होगी।
मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।
भगवान गणेश को क्यों कहा जाता है विघ्नहर्ता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का आह्वान करने की परंपरा है।
भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ बाधाओं को दूर करने वाला है। मान्यता है कि गणपति की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को ज्ञान, बुद्धि एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गणेश चतुर्थी को अलग-अलग क्षेत्रों में विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। कई स्थानों पर गणपति की प्रतिमा स्थापित कर कई दिनों तक पूजा, आरती और भोग का आयोजन किया जाता है।
गणेश जी के अलग-अलग रूपों का क्या है महत्व?
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, भगवान गणेश के स्वरूप के अलग-अलग अंगों को भी प्रतीकात्मक महत्व दिया जाता है।
उनका बड़ा सिर ज्ञान और गहरी सोच का प्रतीक माना जाता है। बड़े कान अधिक सुनने की सीख देते हैं, जबकि छोटा मुंह कम बोलने के महत्व का संदेश देता है।
गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा की स्थापना को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में ही नहीं देखा जाता, बल्कि इसे परिवार में भक्ति, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण बनाने का अवसर भी माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री की पूरी सूची
गणपति पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है। हालांकि, सामान्य पूजा के लिए इन चीजों की जरूरत पड़ सकती है:
- भगवान गणेश की प्रतिमा
- लकड़ी की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- कलश
- आम या अशोक के पत्ते
- नारियल
- रोली और कुमकुम
- अक्षत
- हल्दी
- मौली या कलावा
- गंगाजल
- फूल और माला
- दूर्वा घास
- अगरबत्ती और धूप
- दीपक और घी
- कपूर
- पंचामृत
- फल
- मोदक या लड्डू
- पान और सुपारी
- दक्षिणा
- मिठाई
गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने की सही विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले पूजा स्थल और घर की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद ऐसी जगह चुनें, जहां परिवार के सदस्य आसानी से पूजा में शामिल हो सकें।
पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखें और उसके ऊपर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के नीचे अक्षत रखे जा सकते हैं। अक्षत के लिए साबुत और साफ चावल का इस्तेमाल करने की परंपरा है।
इसके बाद गणेश जी के सामने या दाईं ओर कलश स्थापित कर पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करने के बाद भगवान गणेश का ध्यान और आह्वान करें।
यदि आप प्राण प्रतिष्ठा की पूरी वैदिक प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं, तो किसी योग्य आचार्य या पंडित की सहायता लेना बेहतर माना जाता है। सामान्य घरेलू पूजा में श्रद्धा के साथ भगवान गणेश का ध्यान, आह्वान और पूजन किया जा सकता है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, बुद्धि और मंगल की कामना करते हैं।






















