पीड़िता के परिवार से CM सम्राट चौधरी ने की मुलाकात
Jamui Victim Photo Row: जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक X हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर और एक संदेश साझा किया गया, जिसे बाद में हटा दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने परिवार को त्वरित न्याय का भरोसा दिलाया और आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए कड़ी कार्रवाई की बात कही। मुख्यमंत्री की ओर से साझा किए गए पोस्ट में एक महीने के भीतर दोषियों को कठोर सजा दिलाने की बात कही गई थी। तस्वीर को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ। तस्वीर को कुछ समय बाद मुख्यमंत्री के X हैंडल से हटा दिया गया।
Highlights:
तेजस्वी यादव ने POCSO के तहत कार्रवाई की मांग की
मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करना POCSO कानून की भावना के खिलाफ है। तेजस्वी यादव ने कहा कि नाबालिग पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए और मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि पीड़िता की पहचान उजागर होने को लेकर तेजस्वी यादव और RJD की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं। तस्वीर पोस्ट किए जाने और बाद में हटाए जाने की बात कई मीडिया रिपोर्टों में दर्ज है, लेकिन इस रिपोर्ट में मुख्यमंत्री की ओर से किसी कानूनी उल्लंघन को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
मीसा भारती ने भी FIR दर्ज करने की मांग की
RJD सांसद मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री के X हैंडल से साझा की गई तस्वीर पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या तस्वीर में दिखाई दे रही बच्ची जमुई मामले की पीड़िता है। मीसा भारती ने बिहार पुलिस से मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब पुलिस नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, तो मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी जांच होनी चाहिए। बिहार पुलिस पहले ही सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो को बिना ब्लर के साझा करने के मामलों में कार्रवाई कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस भेजे गए हैं और POCSO तथा अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
जमुई में छात्रा के साथ क्या हुआ था?
यह विवाद 19 सितंबर को जमुई में सामने आई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें कोचिंग से लौट रहे एक किशोर लड़के और लड़की को युवकों के एक समूह ने कथित तौर पर रोका और उनके साथ मारपीट तथा बदसलूकी की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने मामले में POCSO सहित संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच के लिए विशेष टीम भी सक्रिय है। मुख्य आरोपी बताए जा रहे एक व्यक्ति के पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई है। पुलिस का फोकस घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को हटाने की कार्रवाई पर भी है।
न्याय और पहचान की गोपनीयता को लेकर बढ़ी बहस
जमुई मामले में एक तरफ पीड़ित परिवार जल्द न्याय की मांग कर रहा है, वहीं मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सामने आई तस्वीर ने नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की ओर से परिवार को जल्द न्याय का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, RJD ने तस्वीर को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां सोशल मीडिया पोस्ट और पीड़िता की पहचान की गोपनीयता से जुड़े आरोपों पर क्या कदम उठाती हैं। नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए उसकी तस्वीर, नाम या ऐसी कोई जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो सकती है।






















