
झारखंड : आज बिनोद बिहारी महतो समाधि स्थल पर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम में आंदोलनकारी नेता जगत महतो और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जगत महतो ने बताया कि झारखंड अलग राज्य की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारी/आंदोलनकारी तब से उपेक्षित हैं। उनके मुख्य बिंदु और मांगें इस प्रकार रहीं:
- अलग राज्य के लिए संघर्ष में लगे पूर्व संगठनों/आंदोलनकारियों को मासिक पेंशन रु. 3,500 दिए जाने की मांग।
- महिलाएँ जिन्हें सामाजिक सहायता के रूप में निधि दी जा रही है, उन्हें रु. 2,500 मासिक सहायता की व्यवस्था करने का अनुरोध।
- कहा गया कि अनेक पुराने आंदोलनकारी बीमारियों से पीड़ित हैं और उनकी इलाज-सुविधाओं तथा जीवनयापन के लिए किसी ठोस व्यवस्था का अभाव है।
- आंदोलनकारियों के लिए हॉस्पिटल, बस या आवागमन आदि सुविधाओं की भी मांग रखी गई; जताई गई अपेक्षा कि जो लोग झारखंड के निर्माण में लगे थे उन्हें रु. 10,000 जैसी एकमुश्त आर्थिक सहायता/अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
- जगत महतो ने आरोप लगाया कि झारखंड के गठन के बाद भी 15 नवम्बर (स्थापना दिवस) के उपलक्ष्य में आने वाले वर्षों में लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और आज झारखंडवासियों का राज्य “कागज़ों में” ही अलग दिखता है — हक़ीक़त में आम जनता का जीवन-स्तर नहीं सुधरा।
उन्होंने आगामी 15 नवम्बर 2025 को झारखंड स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगाँठ का हवाला देते हुए कहा कि इससे पहले संबंधित केंद्र/राज्य सरकारों को आंदोलनकारियों की माँगों का ठोस हल प्रस्तुत करना चाहिए। जगत महतो ने प्रशासन और सरकार से अपील की कि वे आंदोलनकारियों की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें अन्यथा वे आगे की रणनीति घोषित करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य उपस्थित साथी और नेताओं ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय प्रशासन से प्रत्यक्ष संवाद की माँग की। मोर्चा ने कहा कि वे सही समय पर अपनी अगली योजनाओं की सूचना देंगे।






















