निरसा: धनबाद जिले के निरसा विधानसभा क्षेत्र के कालियासोल ब्लॉक में स्थित ऐलाकेंद्र प्राइमरी स्कूल में शिक्षकों की कमी का मामला सामने आया है। स्कूल में लगभग 150 बच्चे पढ़ते हैं, फिर भी पिछले करीब 15 महीनों से पूरी पढ़ाई-लिखाई का सिस्टम सिर्फ़ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। खबरों के अनुसार, पहले स्कूल में तीन शिक्षक हुआ करते थे। लेकिन, लंबे समय से शिक्षकों की संख्या घटकर सिर्फ़ एक रह गई है। यह स्थिति बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के रोज़मर्रा के कामकाज को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
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एक शिक्षक, पाँच क्लास की ज़िम्मेदारी

अभी एक ही शिक्षक क्लास में पढ़ाने से लेकर पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी दूसरी सभी ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि लगभग 150 छात्रों की पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरतें सिर्फ़ एक व्यक्ति के कंधों पर हैं। ग्रामीण और अभिभावक सवाल उठाते हैं कि एक शिक्षक अलग-अलग क्लास के छात्रों को एक साथ कैसे पर्याप्त समय दे सकता है। यह चिंता भी बढ़ रही है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
शिक्षक के विभागीय काम पर जाने से स्कूल बंद हो जाता है

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब स्कूल के अकेले शिक्षक को विभागीय बैठकों, सरकारी कामों या दूसरे ज़रूरी कामों के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में स्कूल बंद करना पड़ता है। बताया जाता है कि शिक्षक स्कूल का गेट बंद करके चाबी रसोइए या किसी ज़िम्मेदार ग्रामीण को सौंपकर जाते हैं। इस व्यवस्था से सवाल उठता है कि जब शिक्षक विभागीय काम से बाहर हों, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे जारी रह सकती है।
15 महीने से शिक्षकों की कमी पर सवाल

स्कूल की इस लंबे समय से चली आ रही स्थिति ने शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि लगभग 15 महीनों से शिक्षकों की कमी को दूर क्यों नहीं किया गया है। सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा और पर्याप्त संसाधन देने के दावों के बीच, इतने लंबे समय से एक स्कूल का सिर्फ़ एक शिक्षक के भरोसे चलना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की माँग स्थानीय निवासी और अभिभावक माँग कर रहे हैं कि स्कूल में पर्याप्त टीचिंग स्टाफ़ उपलब्ध कराया जाए। वे विभाग से आग्रह करते हैं कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की शिक्षा पर कोई असर न पड़े, इसके लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। सबसे अहम सवाल यह है कि लगभग 150 छात्रों और पांच कक्षाओं की जिम्मेदारी कब तक एक ही शिक्षक के हाथों में रहेगी। अब सबकी नज़रें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि इस समस्या को हल करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।






















