झरिया: तीसरे दिन छठ व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान झरिया के राजा तालाब और आनंद भवन तालाब में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करती नजर आईं। चैती छठ का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो खासकर और से जुड़ा हुआ प्रमुख पर्व है। यह सूर्य उपासना का महाव्रत है, जिसमें व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
व्रती महिलाएं इस पर्व के दौरान अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं।
चैती छठ को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। झरिया के विभिन्न चौक-चौराहों और घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। व्रतियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
इसके अलावा, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के बीच फल, अगरबत्ती और दूध का वितरण भी किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।






















