धनबाद:नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो मां दुर्गा का तीसरा दिव्य स्वरूप हैं। भागवत पुराण में इन्हें सौम्य, शांत और कल्याणकारी देवी बताया गया है। इनकी आराधना से साहस, आत्मविश्वास, सम्मान, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Highlights:
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मां चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं।
- उन्हें धूप, दीप, चंदन, सिंदूर, पुष्प अर्पित करें।
- मां को केसर युक्त खीर या अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं।
- “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” मंत्र का जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती व दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
पूजन के शुभ मुहूर्त (24-25 सितंबर 2025)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:23 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:14 से 03:02 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 09:11 से 10:57 बजे तक
विशेष भोग
- केसर युक्त खीर (मुख्य भोग)
- लौंग, पंचमेवा, इलायची और दूध से बनी मिठाइयाँ
- मिसरी और पेड़े भी अर्पण किए जा सकते हैं
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
- मां सिंह पर सवार होती हैं
- उनके दस भुजाएं हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र हैं
- माथे पर अर्धचंद्र है, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा
- वे शांति और शक्ति का सुंदर समन्वय हैं
ध्यान मंत्र
पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता॥
भावार्थ: सिंह पर आरूढ़, चंड अस्त्रों से युक्त मां चंद्रघंटा मुझ पर कृपा करें।
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालिक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाए।
मूर्ति चंद्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योति जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बात।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटूं महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।
मां चंद्रघंटा का महत्व
- साहस, धैर्य और आत्मबल की प्रतीक
- भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती हैं
- जीवन में शांति, सफलता और समृद्धि लाती हैं





















