Prashant Kishor Statement: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति से जुड़े तीन अलग-अलग मुद्दों पर बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के मामले में उन्होंने उनकी सदस्यता समाप्त होने का दावा किया। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘क्राइम और अपराध’ वाले बयान पर तंज कसते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर टिप्पणी की। इसके अलावा मधुबनी की घटना पर पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े होने की बात कही।
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निर्दलीय MLC के भाजपा में शामिल होने पर उठाए सवाल
दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने कहा कि दोनों की सदस्यता जाना तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विधान पार्षदों ने गैर-संवैधानिक काम किया है। PK के मुताबिक, भाजपा की सरकार भी उनकी सदस्यता बचाने में सफल नहीं होगी। उन्होंने इस मामले को दल-बदल और संवैधानिक प्रावधानों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
सम्राट चौधरी के बयान पर प्रशांत किशोर का तंज
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘क्राइम और अपराध’ पर दिए गए बयान को लेकर भी प्रशांत किशोर ने निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सातवीं पास व्यक्ति को नेता बनाया जाएगा तो उनसे ऐसी ही अपेक्षा की जा सकती है। PK ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हर पांच-दस दिन में जनता को हंसने का अवसर दे देते हैं। उनका यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर सकता है।
मधुबनी घटना पर पीड़ित परिवार के साथ खड़ा जन सुराज
प्रशांत किशोर ने मधुबनी की घटना को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जन सुराज मजबूती से पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। उनके अनुसार, जन सुराज का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुका है। प्रतिनिधिमंडल से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई और जरूरी कदम तय किए जाएंगे।
तीन मुद्दों पर PK ने सरकार और भाजपा को घेरा
प्रशांत किशोर के इन बयानों में विधान परिषद की सदस्यता, मुख्यमंत्री के बयान और मधुबनी की घटना जैसे मुद्दे शामिल रहे। एक ओर उन्होंने निर्दलीय MLC के भाजपा में शामिल होने पर संवैधानिक सवाल उठाए, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री पर राजनीतिक हमला बोला। वहीं मधुबनी मामले में पीड़ित परिवार को समर्थन देने की बात कहकर जन सुराज की आगे की भूमिका का संकेत दिया।
इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में इन तीनों मुद्दों पर चर्चा तेज होने की संभावना है।






















