बोकारो: आज के दौर में जब शादियों में महंगी गाड़ियां, डीजे और आलीशान आयोजन आम बात हो गए हैं, बोकारो जिले के तेलियाडीह गांव से निकली एक अनोखी बारात ने ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपरा की शानदार मिसाल पेश की। जनार्दन की बारात तेलियाडीह गांव से मुंगो बागड़ा तक बैलगाड़ियों में सवार होकर पहुंची। पारंपरिक शैली में निकाली गई यह बारात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
Highlights:
बैलगाड़ियों की कतार और ‘झूमर’ की धुन से बना खास माहौल

लगभग पांच किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान बैलगाड़ियों की कतार, पारंपरिक वेशभूषा में सजे बाराती और ‘कुड़माली झूमर’ गीतों की धुन ने उत्सव जैसा माहौल बना दिया। बाराती पूरे रास्ते ‘झूमर’ की ताल पर नाचते गाते आगे बढ़ते रहे। ढोल, मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की आवाज़ ने गांव के माहौल को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।
रास्ते में ग्रामीणों ने अनोखी बारात का स्वागत किया

जैसे-जैसे बारात आगे बढ़ी, आस-पास के गांवों के लोग इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने इस पारंपरिक बारात के यादगार पलों को अपने मोबाइल फोन में कैद किया। बैलगाड़ियों वाली यह बारात देखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।
संस्कृति और परंपरा को बचाने की पहल

बारात से जुड़े लोगों ने बताया कि इस आयोजन का मकसद सिर्फ शादी की रस्म पूरी करना नहीं, बल्कि अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण पहचान को जीवित रखना भी था। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अगर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इनसे दूर हो सकती हैं। इसी सोच के साथ डीजे के बजाय ‘कुड़माली झूमर’ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता दी गई।
मुंगो बागड़ा पहुंचने पर पारंपरिक स्वागत
मुंगो बागड़ा पहुंचने पर बारात का स्वागत पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ किया गया। इस पहल की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन संस्कृति, सामाजिक एकता और ग्रामीण जीवन की सादगी को नई पहचान देते हैं। शादी समारोह में शामिल बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने काफी समय बाद ऐसी पारंपरिक बारात देखी है और इस आयोजन ने उन्हें पुरानी यादें ताजा करा दीं।
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लोक-विरासत को बचाने का संदेश देती बैलगाड़ी वाली शादी की बारात
जनार्दन की बैलगाड़ी वाली शादी की बारात सिर्फ़ एक शादी का समारोह नहीं थी; इसने अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं को बचाने का संदेश भी दिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि सामाजिक समारोहों में लोक गीतों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सकता है।






















