रांची: रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। यूनिवर्सिटी ने बुधवार को PhD Regulation 2022 को लागू कर दिया है। वर्ष 2026 में पीएचडी करने वाले सभी अभ्यर्थियों को अब इसी रेगुलेशन के तहत शोध कार्य करना होगा। यूनिवर्सिटी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। नए नियम लागू होने के बाद पीएचडी में प्रवेश, कोर्स वर्क, शोधार्थियों की प्रगति रिपोर्ट, गाइड की जानकारी और शोध पर्यवेक्षकों की पात्रता को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इससे पीएचडी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है।
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सेमेस्टर सिस्टम के तहत होगा पीएचडी का कोर्स वर्क
नए रेगुलेशन के तहत पीएचडी में रजिस्ट्रेशन से पहले होने वाला कोर्स वर्क अब सेमेस्टर सिस्टम के आधार पर संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही शोधार्थियों के शोध कार्य की नियमित निगरानी के लिए भी व्यवस्था की गई है। पीएचडी करने वाले प्रत्येक शोधार्थी को अब हर छह महीने में अपनी प्रगति रिपोर्ट संबंधित विभाग में जमा करनी होगी। इससे शोध कार्य की स्थिति का नियमित मूल्यांकन किया जा सकेगा और शोधार्थियों को समय-समय पर अपने कार्य की प्रगति बतानी होगी। विश्वविद्यालय में इस रेगुलेशन को लागू करने में कुलपति डॉ. सरोज शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। वहीं रिसर्च डायरेक्टर एवं सोशल साइंस डीन डॉ. एमपी हसन और उनकी टीम ने रेगुलेशन तैयार करने में काम किया है।
अब विभागाध्यक्ष बताएंगे शोधार्थियों को गाइड की जानकारी
नए नियमों में शोधार्थियों को गाइड से संबंधित समस्या को दूर करने के लिए भी प्रावधान किया गया है। पहले विद्यार्थियों को अपने लिए उपयुक्त गाइड की जानकारी हासिल करने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सभी विभागों के विभागाध्यक्ष शोध करने वाले विद्यार्थियों को गाइड की जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इससे शोधार्थियों को गाइड चुनने और जानकारी प्राप्त करने में पहले की तुलना में सुविधा मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय के नए रेगुलेशन में इस प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है, ताकि पीएचडी के इच्छुक विद्यार्थियों को शुरुआत में ही आवश्यक जानकारी मिल सके।
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम वाले विद्यार्थी भी कर सकेंगे PhD
नए PhD Regulation 2022 में स्नातक विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। अब चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थी पीएचडी के लिए पात्र हो सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थी का चार वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा होना और कम से कम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। वहीं एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस प्रावधान से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए सीधे शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता आसान हो सकता है।
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रांची यूनिवर्सिटी ने पीएचडी कराने वाले गाइड की योग्यता और उनके द्वारा निर्देशित किए जा सकने वाले शोधार्थियों की संख्या भी तय की है। नए नियम के अनुसार प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए पीएचडी होना जरूरी है। साथ ही उनके नाम से कम से कम पांच रिसर्च पब्लिकेशन होना आवश्यक है। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पीएचडी के साथ कम से कम तीन रिसर्च पब्लिकेशन जरूरी होंगे। शोधार्थियों की संख्या को लेकर भी सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत एक प्रोफेसर अधिकतम 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर अधिकतम 4 विद्यार्थियों को पीएचडी करा सकेंगे। नए रेगुलेशन के लागू होने के बाद रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है। अब शोधार्थियों की प्रगति रिपोर्ट, गाइड की उपलब्धता और पर्यवेक्षकों की पात्रता से जुड़े नियमों के तहत शोध कार्य आगे बढ़ेगा।






















