नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और CEO सतीश कुमार ने 23 अगस्त को IRCTC ऑफिस में ‘वॉर रूम’ के कामकाज का रिव्यू किया। बातचीत मुख्य रूप से रेलवे कैटरिंग सर्विस की क्वालिटी, यात्रियों के फीडबैक और किचन के कामकाज पर नज़र रखने वाले सिस्टम पर केंद्रित रही। रिव्यू के दौरान, यात्रियों की शिकायतों को तुरंत समझने और उनका समाधान करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम को ज़्यादा जवाबदेह और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने पर ज़ोर दिया गया।
Highlights:
‘रेल मदद’ शिकायतों की कड़ी निगरानी
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने निर्देश दिया कि ‘रेल मदद’ इंटरफ़ेस को और ज़्यादा ऑटोमेटेड और यूज़र-फ्रेंडली बनाया जाए, ताकि यात्री अपनी शिकायतें संबंधित सिस्टम तक आसानी से पहुंचा सकें। ‘रेल मदद’ के ज़रिए मिलने वाली शिकायतों पर बारीकी से नज़र रखने पर भी ज़ोर दिया गया। यह सुझाव दिया गया कि ज़रूरत पड़ने पर यात्रियों से सीधे बातचीत की जाए ताकि उनकी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके और समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके।
रेलवे किचन की बेहतर रियल-टाइम मॉनिटरिंग
कैटरिंग सर्विस से जुड़े किचन के लिए कैमरा-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को और मज़बूत करने के निर्देश जारी किए गए। अभी किचन के कामकाज पर नज़र रखने के लिए चार कैमरा फ़ीड उपलब्ध हैं। अब रॉ मटीरियल स्टोरेज एरिया में अतिरिक्त कैमरे और एक PTZ (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरा लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किचन की गतिविधियों की ज़्यादा प्रभावी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।
रोटी और पराठा बनाने की प्रक्रिया का रिव्यू
रिव्यू के दौरान रोटी और पराठा बनाने की प्रक्रिया पर खास ध्यान दिया गया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कमियों का पता लगाने और कैटरिंग की क्वालिटी में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की गहन जांच के निर्देश दिए। अनंतपुर (साउथ सेंट्रल रेलवे) में एक किचन के निरीक्षण और वीडियो मॉनिटरिंग के बाद सुधार की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया। ऐसी कमियों के संबंध में नोटिस जारी करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया गया।
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खराब प्रदर्शन करने वाली निरीक्षण एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
रेलवे कैटरिंग सर्विस में थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसियों की भूमिका का भी रिव्यू किया गया। यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न हों, बल्कि प्रभावी और परिणाम-उन्मुख हों। लगातार खराब प्रदर्शन करने वाली एजेंसियों का रिव्यू करने और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें सूची से हटाने जैसे उपाय करने का प्रस्ताव रखा गया। AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल के बारे में भी चर्चा की गई। यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए थे कि चूहों, कॉकरोच या अन्य कमियों जैसी समस्याओं पर केवल अलर्ट ही न दिया जाए, बल्कि औपचारिक चेतावनी और ज़रूरी सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएं। रेलवे बोर्ड की इस समीक्षा का मकसद खान-पान सेवाओं, साफ़-सफ़ाई और निगरानी के तरीकों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, ताकि यात्रियों को ज़्यादा भरोसेमंद और यात्री-केंद्रित सेवाएं मिल सकें।






















