रांची: खेल के मैदान पर देश और झारखंड का नाम रोशन करने वाली पैरा एथलीट पुष्पा मिंज आज आर्थिक परेशानियों से जूझ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी पुष्पा मिंज फिलहाल रांची के कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेचकर अपना गुजारा कर रही हैं।
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पुष्पा मिंज ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीते हैं। एशियन स्तर की प्रतियोगिता में भी उनके नाम ब्रॉन्ज मेडल है। इसके बावजूद उनकी मौजूदा जिंदगी आर्थिक संघर्ष से गुजर रही है।
कोरोना के बाद सब्जी बेचने को हुईं मजबूर
पुष्पा मिंज के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वह कड़रू ब्रिज के नीचे सब्जी बेच रही हैं। कोरोना महामारी के बाद उन्होंने आजीविका चलाने के लिए यह काम शुरू किया। इससे पहले वह कॉलेज में पढ़ाई करती थीं।
वर्तमान में वह रांची में किराये के मकान में रहती हैं और करीब 2 हजार रुपये मासिक किराया देती हैं। उनके मुताबिक, वह सुबह करीब 6:30 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक सब्जी बेचती हैं।
पुष्पा मिंज बताती हैं कि रोजाना करीब 100 से 200 रुपये तक की ही बिक्री हो पाती है। कई बार पूरी सब्जी नहीं बिकती और खराब होने के कारण उसे फेंकना पड़ता है। ऐसे में सब्जी खरीदने में लगाया गया पैसा भी वापस नहीं निकल पाता।
आर्थिक परेशानी के बावजूद खेल जारी
आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी पुष्पा मिंज ने खेल से दूरी नहीं बनाई है। वह अब भी थ्रोबॉल की प्रैक्टिस करती हैं। हालांकि, अभ्यास स्थल तक आने-जाने का खर्च भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है।
पुष्पा मिंज का कहना है कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए रहने और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें अपना मैदान और हॉस्टल जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। वह चाहती हैं कि खिलाड़ियों के लिए रहने की व्यवस्था और थ्रोबॉल अभ्यास के लिए अलग मैदान उपलब्ध कराया जाए।
उनका कहना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने पर वह अपने खेल को और आगे ले जा सकती हैं।
नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में किया भारत का प्रतिनिधित्व
पुष्पा मिंज ने नेपाल, थाईलैंड और कंबोडिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। पुष्पा मिंज अपने खेल सफर में कोच मुकेश को महत्वपूर्ण योगदान देने वाला व्यक्ति बताती हैं। उनके अनुसार, कोच ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार सहयोग दिया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी राशि मिलने का इंतजार
पुष्पा मिंज के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी। उस दौरान खिलाड़ियों का सम्मान किया गया था।
पुष्पा मिंज का दावा है कि प्रतियोगिता में हुए खर्च की राशि वापस किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें अभी तक वह राशि नहीं मिली है। इस संबंध में उनकी ओर से बताई गई स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
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सरकार से नौकरी की मांग, ताकि खेल पर दे सकें पूरा ध्यान
पुष्पा मिंज की सबसे बड़ी मांग सरकारी नौकरी है। उनका कहना है कि नौकरी मिलने से उन्हें सब्जी बेचकर आजीविका चलाने की मजबूरी से राहत मिलेगी और वह अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने देश और झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए कई पदक जीते हैं और आज भी उनके अंदर आगे बढ़ने का जज्बा है। वह चाहती हैं कि सरकार उन्हें ऐसी नौकरी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए, जिससे उनका जीवन स्थिर हो सके और वह नियमित अभ्यास कर भविष्य में देश के लिए और पदक जीत सकें।






















