Dharti Pakad Nagarmal Bajoria: लोकतंत्र में अपनी अनोखी भागीदारी और चुनाव लड़ने के जुनून के लिए पहचाने जाने वाले नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भागलपुर के एमपी द्विवेदी मार्ग के निवासी थे और उनका निधन पटना में हुआ।
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नागरमल बाजोरिया ने अपने लंबे जीवन में पंचायत स्तर से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति तक के चुनाव में भाग लिया। बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 281 से अधिक चुनाव लड़े। हालांकि अधिकांश चुनावों में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी लगातार भागीदारी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और प्रणब मुखर्जी के खिलाफ भी लड़ा चुनाव
नागरमल बाजोरिया केवल स्थानीय चुनावों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कई चर्चित चुनावों में भी अपनी उम्मीदवारी पेश की।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा था। इसके अलावा वर्ष 2012 में राष्ट्रपति पद के चुनाव में भी उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की थी, जिसमें प्रणब मुखर्जी उम्मीदवार थे।
इन चुनावों के कारण बाजोरिया को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उनके लिए चुनाव लड़ना केवल जीत या हार का सवाल नहीं था, बल्कि लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी का माध्यम था।
93 साल की उम्र में भी नहीं छोड़ा चुनाव लड़ने का जुनून
राजनीति और चुनाव के प्रति नागरमल बाजोरिया की दिलचस्पी उम्र के साथ कम नहीं हुई। 93 वर्ष की आयु में भी उन्होंने चुनाव लड़ने की तैयारी की थी।
बताया जाता है कि उस समय स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पुरानी दिल्ली, रायबरेली और पटना साहिब लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन की तैयारी की। प्रचार के लिए उन्होंने एक मारुति वैन भी खरीदी थी।
लगातार हार के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ। लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी का उनका यह जुनून ही उन्हें आम नेताओं और उम्मीदवारों से अलग बनाता था।
लाहौर से भागलपुर आए, शहर में खड़ा किया अपना व्यवसाय
नागरमल बाजोरिया का परिवार वर्ष 1930 में लाहौर से भागलपुर आकर बस गया था। इसके बाद उन्होंने भागलपुर में अपना व्यवसाय स्थापित किया और शून्य से अपनी अलग पहचान बनाई।
उनका जीवन केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं था। शहर की समस्याओं के समाधान में भी वे अपनी भूमिका निभाते रहे। भागलपुर में गंभीर पेयजल संकट के दौरान उन्होंने अपने निजी खर्च से कई सार्वजनिक स्थानों पर नलकूप लगवाए थे।

स्थानीय लोगों के प्रति उनके इसी जुड़ाव और जनहित के कामों के कारण शहरवासियों ने उन्हें प्यार से ‘धरती पकड़’ नाम दिया।
परिवार में तीन बेटे, व्यवसाय से जुड़े हैं सदस्य
नागरमल बाजोरिया के परिवार में उनके तीन बेटे हैं। उनके बड़े पुत्र सतीश कुमार बाजोरिया भागलपुर में गोविंद चूड़ी भंडार का संचालन करते हैं। वहीं उनके अन्य पुत्र अजय कुमार और दिलीप कुमार पटना में व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

नागरमल बाजोरिया का निधन भागलपुर के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास के एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है, जिन्होंने चुनावी हार से कभी निराश हुए बिना लोकतंत्र के प्रति अपनी आस्था और भागीदारी को जीवनभर बनाए रखा।






















