बिहार में बनेगा देश का पहला समर्पित महिला विश्वविद्यालय, सभी पदों पर महिलाओं की होगी नियुक्ति
Bihar Women University: बिहार सरकार ने महिलाओं की उच्च शिक्षा, शोध और शैक्षणिक नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए एक अलग महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा समर्पित संस्थान होगा, जहां कुलपति से लेकर प्रोफेसर, अधिकारी और अन्य स्टाफ तक सभी पदों पर महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराना है। इस घोषणा को महिला सशक्तिकरण और उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
Highlights:
महिला आयोग की 25वीं वर्षगांठ पर हुई घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बिहार राज्य महिला आयोग की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान महिला आयोग के लोगो पर आधारित विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। इस डाक टिकट का इस्तेमाल महिला आयोग की ओर से जारी होने वाले लिफाफों, नोटिस और समन पर किया जाएगा। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से जीविका समूहों की सदस्य भी शामिल हुईं।
महिला आयोग की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों की सुनवाई और समाधान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आयोग को महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सरकार को नियमित सुझाव भी देने चाहिए। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने में आयोग की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर नीतिगत सुझाव देने के लिए आयोग को अधिक प्रभावी मंच के रूप में काम करना चाहिए।
एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रोजगार से संबंधित सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में 10 लाख सरकारी नौकरियां और 10 लाख रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, वर्ष 2025 तक युवाओं को 11.50 लाख सरकारी नौकरियां और 43 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
पंचायतों में आरक्षण से बढ़ा महिला प्रतिनिधित्व
सम्राट चौधरी ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था के बाद बिहार में विभिन्न स्तरों पर करीब 60 प्रतिशत महिला प्रतिनिधि नेतृत्व की भूमिका में पहुंची हैं। उन्होंने इसे स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
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33 प्रतिशत आरक्षण से पहले 40 प्रतिशत टिकट देने की अपील
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दलों से भी अपील की। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से पहले राजनीतिक दलों को महिलाओं को कम से कम 40 प्रतिशत टिकट देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने महिला आयोग को महिला राजनीतिक कार्यकर्ताओं को तैयार करने के लिए एक मजबूत प्रशिक्षण और नेतृत्व मंच के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करना भी सशक्तिकरण का अहम हिस्सा है।




















