भव्य कलश शोभायात्रा के साथ महोत्सव का शुभारंभ
Nalanda Shri Sant Baba Mahotsav: शहर से सटे राजाकुआं मोहल्ले में मंगलवार को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ श्री संत बाबा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गाजे-बाजे और भक्तिमय वातावरण के बीच निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सिर पर कलश लेकर चल रहीं महिलाओं और बाबा के जयकारे लगाते श्रद्धालुओं से पूरा इलाका भक्तिमय नजर आया। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु श्री संत बाबा के दरबार में पहुंचे और आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई।
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पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने मांगी सुख-शांति

कलश शोभायात्रा के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने श्री संत बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना की। लोगों ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महोत्सव को लेकर राजाकुआं और आसपास के इलाकों में सुबह से ही उत्साह का माहौल बना रहा। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी रही।
5 अक्टूबर तक चलेगा श्री संत बाबा महोत्सव

श्री संत बाबा महोत्सव का आयोजन 22 सितंबर से शुरू होकर 5 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रमों का निर्धारित क्रम इस प्रकार है:
- 23 से 30 सितंबर: विशेष पूजा-अनुष्ठान
- 1 अक्टूबर: श्रीराम कथा का शुभारंभ
- 3 अक्टूबर: अखंड कीर्तन शुरू
- 5 अक्टूबर: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति और महोत्सव का समापन
आयोजकों की ओर से महोत्सव को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
प्राचीन कुएं के पानी को अमृत समान मानते हैं श्रद्धालु

श्री संत बाबा के आश्रम में स्थित प्राचीन कुआं श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान भी इस कुएं का पानी सूखता नहीं है और ठंडा बना रहता है। श्रद्धालु इस पानी को अमृत के समान मानते हैं। इसके अलावा आश्रम की मिट्टी को भी पवित्र समझकर लोग अपने घर ले जाते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता और बाबा का आशीर्वाद बना रहता है।
खड़ाऊं और पीढ़ा चढ़ाने की पुरानी परंपरा
श्री संत बाबा के दरबार में मन्नत पूरी होने के बाद खड़ाऊं और पीढ़ा चढ़ाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, बाबा अपने जीवनकाल में किसी को पैर छूने की अनुमति नहीं देते थे। भक्त उनकी खड़ाऊं का स्पर्श कर आशीर्वाद लेते थे। इसी परंपरा के तहत आज भी श्रद्धालु बाबा को खड़ाऊं और पीढ़ा अर्पित करते हैं।






















