Madhepura Gold Smuggling: बागडोगरा में ब्लैक फॉरच्यूनर के गुप्त चैंबर से 465 ग्राम सोना बरामद होने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। पुलिस ने इस मामले में सहरसा निवासी सावन कुमार और रमन कुमार को गिरफ्तार किया है। बरामद सोने की कीमत करीब 70 लाख रुपये बतायी जा रही है। प्रारंभिक जांच में दोनों के सिलीगुड़ी से सोने की खेप लेकर सहरसा लौटने की जानकारी सामने आयी है। सोना बरामद होने के बाद पुलिस के सामने अब कई सवाल हैं। सोने की खेप कहां से आयी, इसे सहरसा में किसे पहुंचाया जाना था और फॉरच्यूनर के गुप्त चैंबर का इस्तेमाल पहले भी हुआ था या नहीं, जैसे बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ सकती है।
Highlights:
सहरसा के स्वर्ण कारोबारी के नाम पर पंजीकृत है फॉरच्यूनर
जिस ब्लैक फॉरच्यूनर से सोना बरामद किया गया है, उसका नंबर बीआर-19 टी-0005 बताया गया है। पुलिस और परिवहन विभाग से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह वाहन सहरसा के स्वर्ण कारोबारी सोनू कुमार सोनी के नाम पर पंजीकृत है। वाहन के स्वामित्व की जानकारी सामने आने के बाद जांच में यह भी देखा जा सकता है कि फॉरच्यूनर गिरफ्तार दोनों युवकों तक कैसे पहुंची। इसके अलावा पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इस वाहन का इस्तेमाल पहले कभी सोने की खेप लाने या ले जाने के लिए किया गया था या नहीं।
वाहन मालिक की भूमिका पर फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं
वाहन मालिक की भूमिका को लेकर फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि, जांच के दौरान पुलिस वाहन की पूर्व यात्राओं, इसे इस्तेमाल करने वाले लोगों और गिरफ्तार युवकों के साथ वाहन मालिक के संबंधों की जानकारी जुटा सकती है। फॉरच्यूनर में गुप्त चैंबर कब तैयार कराया गया और इसे तैयार कराने में किसकी भूमिका थी, यह भी जांच का एक संभावित पहलू हो सकता है। वाहन की तकनीकी जांच और उसके इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड से भी पुलिस को जानकारी मिल सकती है।
भूटान-बंगाल-बिहार कनेक्शन की भी जांच संभव
सोने की तस्करी के संभावित रूट को लेकर भूटान-बंगाल-बिहार कनेक्शन भी जांच का अहम पहलू बन सकता है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से सिलीगुड़ी के रास्ते बिहार तक विदेशी मूल का सोना पहुंचाने वाले किसी नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में बरामद 465 ग्राम सोने का वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है। सोना कहां से आया और किसके लिए भेजा गया था, इसका खुलासा पुलिस जांच आगे बढ़ने के बाद ही हो सकेगा।
सहरसा में किसे पहुंचाई जानी थी 70 लाख की खेप?
जांच के सबसे अहम सवालों में यह भी शामिल है कि करीब 70 लाख रुपये मूल्य की बतायी जा रही 465 ग्राम सोने की खेप सहरसा में किसे पहुंचायी जानी थी। गिरफ्तार दोनों युवकों से पूछताछ में इस संबंध में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन, संपर्कों, कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और पूर्व यात्राओं को भी खंगाला जा सकता है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश हो सकती है कि दोनों युवकों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे और सोने की खेप सहरसा पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हें किसने दी थी।
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पूछताछ से खुल सकते हैं तस्करी नेटवर्क के राज
गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ के जरिए सोने की तस्करी से जुड़े संभावित अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। खेप उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति, इसे सिलीगुड़ी से आगे भेजने वाले लोगों और सहरसा में इसे प्राप्त करने वाले संभावित व्यक्ति की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है। अगर पुलिस रिमांड में पूछताछ होती है तो फॉरच्यूनर के इस्तेमाल, गुप्त चैंबर और सोने की खेप से जुड़े सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संभावित नेटवर्क और अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
465 ग्राम सोने की बरामदगी के बाद बढ़ी जांच की अहमियत
ब्लैक फॉरच्यूनर के गुप्त चैंबर से 465 ग्राम सोना बरामद होने और सहरसा के दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल सोने के स्रोत, वाहन के इस्तेमाल और खेप के संभावित गंतव्य को लेकर कई सवाल हैं। इनका जवाब पुलिस जांच और गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल बरामद सोने की कीमत करीब 70 लाख रुपये बतायी जा रही है और मामले में आगे की जांच जारी है।






















