झारखंड में 13 प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला
Jharkhand Administrative Officers Transfer: झारखंड सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 13 अधिकारियों का तबादला करते हुए कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके साथ ही सचिवालय सेवा के चार कर्मियों का भी स्थानांतरण किया गया है। वहीं, तीन अधिकारियों के खिलाफ लंबित विभागीय मामलों में भी निर्णय लिया गया है।
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इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
अधिसूचना के अनुसार, मेनका को ग्रामीण विकास विभाग में संयुक्त निर्वाचन आयुक्त बनाया गया है। हरिवंश पंडित को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक (प्रशासन) की जिम्मेदारी दी गई है। दिनेश कुमार रंजन को पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मनीष कुमार को परिवहन विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है। मुमताज अंसारी को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में संयुक्त सचिव और महेंद्र कुमार को पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बनाया गया है। वहीं, सुदेश कुमार वर्मा को वाणिज्य कर विभाग में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रतीक्षारत अधिकारियों को भी मिली पोस्टिंग
सरकार ने लंबे समय से पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी दी है। अजय कुमार तिर्की को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में उप सचिव बनाया गया है। आलोक कुमार को झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और संजीव कुमार लाल को राज्य सूचना आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा धीरज प्रकाश को खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में अवर सचिव, मनीषा वत्स को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में अवर सचिव, बिपिन कुमार दुबे को तकनीकी शिक्षा विभाग में अवर सचिव और विनय प्रकाश तिग्गा को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में अवर सचिव बनाया गया है। सचिवालय सेवा के चार कर्मियों बिरसा मुंडा बोयपाई, अनुज कुमार रजक, चंदन कुमार और जयकांत प्रसाद का भी स्थानांतरण किया गया है।
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तीन अधिकारियों के विभागीय मामलों में फैसला
कार्मिक विभाग ने तीन अधिकारियों से जुड़े लंबित विभागीय मामलों में भी निर्णय लिया है। कर्रा के तत्कालीन अंचल अधिकारी बैद्यनाथ कामती पर 28 डिसमिल भूमि के कथित अवैध नामांतरण का आरोप है। खूंटी उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं, गुमला के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय पीएम कुजूर को हाईकोर्ट से राहत मिलने के आधार पर विभागीय कार्रवाई से मुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ एक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश भी वापस ले लिया गया है। जामताड़ा के तत्कालीन उप विकास आयुक्त निरंजन कुमार पर कर्मियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था। आयुक्त स्तर की जांच में आरोप निराधार पाए जाने के बाद उन्हें चेतावनी देते हुए विभागीय प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है।






















