Bhagalpur Ganga Erosion: जिले के राघोपुर में गंगा नदी के कटाव ने भारी तबाही मचा दी है। कटाव के कारण तटबंध का 125 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया है। इसकी चपेट में आकर छह से अधिक पक्के मकान और कई झोपड़ीनुमा घर ध्वस्त हो चुके हैं। वहीं, कई अन्य मकानों पर भी नदी में समाने का खतरा बना हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में घर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगातार बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीण अपने घर और सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
Highlights:
राघोपुर में कटाव से भारी तबाही, कई घर हुए ध्वस्त
राघोपुर में गंगा का कटाव लगातार ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। तटबंध का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद आसपास के मकानों पर भी खतरा बढ़ गया है। कई परिवारों के घर नदी में समा चुके हैं, जबकि अन्य लोगों को भी अपने आशियाने उजड़ने की आशंका सता रही है। प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को घर खाली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की है।

ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल और विधायक ने लिया हालात का जायजा
कटाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और स्थानीय विधायक इंजीनियर शैलेंद्र मौके पर पहुंचे। दोनों ने प्रभावित इलाके की स्थिति का जायजा लिया। वहीं, इंजीनियरों की टीम की निगरानी में कटावरोधी कार्य दोबारा शुरू कराया गया है। प्रशासन और तकनीकी टीम का प्रयास है कि कटाव को जल्द नियंत्रित किया जाए, ताकि बचे हुए मकानों और ग्रामीणों की जमीन को बचाया जा सके।

मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद भी तटबंध क्यों नहीं बचा?
राघोपुर में तटबंध का बड़ा हिस्सा ध्वस्त होने के बाद कटावरोधी कार्यों की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले महीने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इलाके का निरीक्षण किया था और हवाई सर्वेक्षण के जरिए स्थिति का जायजा लिया था। इसके बावजूद तटबंध का 125 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया। स्थानीय हालात ने यह सवाल खड़ा किया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने और निरीक्षण के बावजूद तटबंध को नुकसान से क्यों नहीं बचाया जा सका। हालांकि, कटाव के कारणों और रोकथाम के लिए किए गए कार्यों की प्रभावशीलता पर आधिकारिक तकनीकी निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

जलस्तर घटने के बाद भी जारी है गंगा का कटाव
हैरानी की बात यह है कि गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी राघोपुर में कटाव का खतरा कम नहीं हुआ है। नदी के किनारे बसे परिवारों के घरों पर लगातार खतरा बना हुआ है। कई ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने की चिंता सता रही है। ग्रामीणों के लिए यह केवल मकानों के नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि उनकी जमीन, आजीविका और वर्षों की मेहनत से बने आशियानों के उजड़ने का संकट भी है।
कटावरोधी कार्यों पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीदें
फिलहाल मंत्री मौके पर मौजूद हैं और इंजीनियरों की टीम कटाव रोकने में जुटी है। प्रशासन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दे रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कटाव पर कितनी जल्दी नियंत्रण पाया जा सकता है और बचे हुए घरों व जमीन को किस हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। हर साल कटाव की मार झेलने वाले ग्रामीण स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना होगा कि मौजूदा कटावरोधी कार्य कितने प्रभावी साबित होते हैं और प्रभावित परिवारों को राहत एवं सुरक्षा देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।






















