Mann Ki Baat 139th Episode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए स्वदेशी उत्पादों, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना से भारतीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के बाजारों में भी पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री ने पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती, महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और उत्तराखंड में हेवल नदी के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को प्रोत्साहित करने की अपील भी की।
Highlights:
वोकल फॉर लोकल से भारतीय उत्पादों को मिल रही पहचान
पीएम मोदी ने कहा कि त्योहारों के मौसम में स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रवृत्ति को देश के स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए सकारात्मक बताया। प्रधानमंत्री ने बिहार के मखाना, कर्नाटक की अरहर दाल और खादी जैसे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं। उन्होंने लोगों से स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार वस्तुओं को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत बनाने की अपील की।
पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा
मन की बात में प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को प्रोत्साहित करने की पहल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की संस्था पारंपरिक और जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का काम कर रही है। इस पहल को ‘नव-त्रिन्जन’ नाम दिया गया है। पीएम मोदी के अनुसार, इस पहल के तहत बिना रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किए कपास उगाने पर जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से तैयार धागों और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की जरूरत कम हो सकती है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों की ओर से तैयार उत्पादों और उनकी पैकेजिंग की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और पारंपरिक शैली को जगह दी गई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस पैकेजिंग को जापान के प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने इसे स्थानीय कला और उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने वाला उदाहरण बताया।
हेवल नदी को बचाने के लिए ग्रामीणों ने मिलकर किया प्रयास
मन की बात के दौरान पीएम मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी और प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर घटने और आसपास के जल स्रोतों के सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन तथा ग्रामीणों ने मिलकर संरक्षण अभियान चलाया। इस पहल में वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर बढ़ाने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे उपाय शामिल किए गए। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से हेवल नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ और कई प्राकृतिक जल स्रोत फिर से बहाल हुए। उन्होंने जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक भागीदारी को जरूरी बताया।
त्योहारों से पहले स्वच्छता अभियान चलाने की अपील
दीपावली और छठ जैसे त्योहारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। पीएम मोदी ने कहा कि छोटी-छोटी कोशिशों से भी आसपास के वातावरण में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने लोगों को त्योहारों के दौरान स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी मानकर अभियान में भाग लेने का संदेश दिया।
मन की बात को बताया जनभागीदारी की यात्रा
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के 12 वर्षों के सफर को याद करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश के आम लोगों के परिश्रम, साहस, संकल्प और सेवा भावना को सामने लाने का माध्यम बना है। उन्होंने कार्यक्रम को तीर्थयात्रा जैसा अनुभव बताते हुए कहा कि इसके जरिए उन्हें देशवासियों के प्रयासों को करीब से समझने और उनके योगदान का सम्मान करने का अवसर मिलता है। पीएम मोदी ने श्रोताओं को इस यात्रा का सहभागी और मार्गदर्शक भी बताया।






















