ओस्लो:इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नोबेल समिति ने वर्ष 2025 का शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को देने की घोषणा की है।
Highlights:
मारिया मचाडो, जो वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही हैं, को यह पुरस्कार तानाशाही के खिलाफ साहसिक विरोध, निष्पक्ष चुनावों की मांग और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है। नोबेल समिति ने कहा कि वेनेजुएला जैसे देश में राजनीतिक सक्रियता खुद में एक साहसिक कार्य है, और मारिया मचाडो इस लड़ाई की प्रतीक बन चुकी हैं।
ट्रंप के दावों को नहीं मिला समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप, जो 20 जनवरी 2025 को दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने, कई बार खुले मंचों से नोबेल शांति पुरस्कार की दावेदारी जता चुके थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने “आठ युद्धों को रुकवाया”, और यह विश्व इतिहास में अभूतपूर्व है। उनके समर्थक देशों—जैसे इज़राइल और पाकिस्तान—ने भी उनके पक्ष में संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य मंचों पर नोबेल पुरस्कार देने की मांग की थी।
हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के नियमों के अनुसार, नामांकन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2025 थी, जबकि ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी को शुरू हुआ था। ऐसे में उनके अधिकांश दावे नामांकन अवधि के बाद के हैं, इसलिए वे औपचारिक रूप से इस वर्ष की दौड़ में पीछे रह गए।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
पुरस्कार की घोषणा से पहले ही ट्रंप ने अपनी झुंझलाहट जाहिर करते हुए कहा था:
“मैंने आठ युद्ध रुकवाए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। अब उन्हें (नोबेल समिति को) जो करना है, वह करें।”
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर भी नाराजगी जताई, और कहा कि “ओबामा ने देश को बर्बाद किया, फिर भी उन्हें पुरस्कार मिला।”
विजेता को क्या मिलेगा?
मारिया मचाडो को पुरस्कार स्वरूप स्वर्ण पदक, नोबेल प्रमाण पत्र, और 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 8 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान 10 दिसंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया जाएगा।





















