
धनबाद : एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स कोलकाता में 19 से 25 अप्रैल तक आयोजित ‘समन्वय’ कला प्रदर्शनी केवल चित्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि दोस्ती, यादों और रचनात्मकता का एक अनोखा उत्सव बनकर उभरी है। इस प्रदर्शनी का आयोजन गवर्मेंट कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट के 1999 बैच के पूर्व छात्रों द्वारा किया गया है।
करीब ढाई दशक बाद एक मंच पर जुटे इन कलाकारों के लिए ‘समन्वय’ किसी पुनर्मिलन से कम नहीं है। जीवन की व्यस्तताओं और देश-विदेश में फैले करियर के बीच बिछड़े ये साथी इस आयोजन के जरिए फिर एक-दूसरे के करीब आए हैं। आयोजकों के मुताबिक, यह कुछ दिन उनके लिए “ऑक्सीजन” की तरह हैं, जो पूरे साल उनके रिश्तों को जीवंत बनाए रखते हैं।
प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिकला और विभिन्न माध्यमों की कलाकृतियों की समृद्ध श्रृंखला देखने को मिल रही है। हर कृति कलाकारों के व्यक्तिगत अनुभवों, भावनाओं और उनकी रचनात्मक यात्रा की कहानी बयां करती है, जो दर्शकों को गहराई से जोड़ती है।
इस आयोजन का भावनात्मक पक्ष भी उतना ही गहरा है। ‘समन्वय’ उन चार साथियों को श्रद्धांजलि भी है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। प्रदर्शनी के दौरान उन्हें मौन रखकर याद किया गया, जिसने माहौल को भावुक बना दिया। मुखरूप से आर्टिस्ट दिव्येंदु उकील
राजेश चक्रबर्ती द्वारा तस्वीर बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।
इस प्रदर्शनी का मुख्य अतिथि के रूप में कवि कल्लो बनर्जी उपस्थित थे ।
दोस्ती, प्रेम और एकता का प्रतीक बनी यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए 25 अप्रैल तक खुली रहेगी, जहां रंगों के साथ रिश्तों की गर्माहट भी महसूस की जा सकती है।इस आर्ट प्रदर्शन में विशेष रूप से कनाडा के आर्टिस्ट (एनिमेटर) राजेश चक्रबर्ती की पेंटिंग प्रदर्शित हैं।
इसके अलावा आर्टिस्ट रूपा पाल की वीडियो आर्ट, परिमल पाल का कल्पचर प्रदर्शित है। कोलकात के बड़े बड़े दुर्गा प्रतिमा परिमल के हाथों से तैयार होता हैं।
आर्टिस्ट असीम पाल, गौतम सरकार, शांतनु दास, सरसी दास रॉय, सुनेत्रा चटर्जी, अर्नब चट्टोपाध्या एवं सुब्रतो कुंडू सहित सैंकड़ों चित्रकारों की पेंटिंग प्रदर्शित किया गया हैं।






















