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Sunday, July 26, 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: 987 दिन बाद मिला कोटद्वार कोर्ट में इंसाफ! रसूखदार नहीं बचा, ‘सच’ ने जीत हासिल की

कोटद्वार कोर्ट का बड़ा फैसला – पुलकित आर्या समेत तीन दोषियों को उम्रकैद, अब तक नाम न आया सामने वो वीआईपी कौन था?

कोटद्वार, उत्तराखंड – एक आम लड़की, बड़े सपने… और दरिंदगी की इंतिहा! 18 सितंबर 2022 को यमकेश्वर के एक रिसॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आज, करीब 2 साल 8 महीने बाद, कोटद्वार की एडीजे रीना नेगी कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाकर इस बहुचर्चित हत्याकांड में ‘न्याय की मुहर’ लगा दी।

कौन थे दोषी? पुलकित आर्या – रसूख, रुतबा और अब उम्रकैद!

कोटद्वार कोर्ट ने पाया मुख्य आरोपी पुलकित आर्या – वनंतरा रिजॉर्ट का मालिक और एक प्रभावशाली नेता का बेटा। उसके साथ दो अन्य – सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया।

पुलकित पर चार गंभीर धाराएं लगी थीं:

  • धारा 302 – हत्या

  • धारा 201 – साक्ष्य मिटाना

  • धारा 354A – छेड़छाड़

  • अनैतिक देह व्यापार अधिनियम – महिला को जबरन भेजने की कोशिश

तीनों को अब उम्रकैद काटनी होगी – वही जेल की चारदीवारी, जहां रसूख काम नहीं आता।

987 दिन, 500 पेज की रिपोर्ट, 97 गवाह – आखिरकार मिला इंसाफ

इस हत्याकांड के बाद जहां एक तरफ सरकार पर आरोप लगे कि आरोपी को बचाने की कोशिश की जा रही है, वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी का रुख बिल्कुल स्पष्ट था – “कोई भी आरोपी बच नहीं पाएगा”।
एसआईटी बनी, 24 घंटे में गिरफ्तारियां हुईं, चार्जशीट दाखिल हुई और 47 गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया।

कोटद्वार कोर्ट का यह फैसला नहीं सिर्फ अंकिता के परिवार के लिए राहत है, बल्कि पूरे देश की उन लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सपनों को लेकर घरों से निकलती हैं।

यह भी पढ़ें : गिरिडीह जिला अंतर्गत जमुआ प्रखंड के खरगडीहा से बेलकुंडी तक सड़क निर्माण अधर में, ग्रामीणों में गहराया असंतोष

हत्याकांड से ज्यादा हैरान करने वाला ‘वीआईपी एंगल’ – पर नाम अब भी गुमनाम

जांच में सामने आया कि पुलकित आर्या अपने रिसॉर्ट में खास वीआईपी गेस्ट्स को “स्पेशल ट्रीटमेंट” देता था। और इसी ‘ट्रीटमेंट’ के लिए अंकिता को जबरन पेश करने की कोशिश की गई थी। लेकिन जब अंकिता ने इनकार किया – उसकी कीमत उसे जान देकर चुकानी पड़ी।

सवाल ये है:
कौन था वो वीआईपी?
क्या कभी उसका नाम सामने आएगा?
क्या वो भी कानून के शिकंजे में आएगा, या हमेशा पर्दे के पीछे छुपा रहेगा?

सिर्फ एक केस नहीं, पूरे समाज का आईना है यह घटना

अंकिता उस भारत की बेटी थी, जो छोटे कस्बों से निकलकर कुछ करने का सपना देखती है। उसकी हत्या ने मध्यमवर्गीय परिवारों की नींद उड़ा दी थी। डर था कि रसूख कानून से ऊपर न निकल जाए। लेकिन अब जब फैसला आया है, तो इसे ‘जनता की जीत’, ‘कानून की जीत’ और ‘सच की विजय’ के रूप में देखा जा रहा है।

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