बांकुड़ा में तीन माओवादी कमांडरों ने किया आत्मसमर्पण
Bankura Maoist Surrender: पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन को बुधवार को बड़ा झटका लगा। बांकुड़ा में संगठन से जुड़े तीन शीर्ष कमांडरों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मंडी उर्फ महादेव उर्फ सचिन, जोनल कमेटी सदस्य जबा महतो उर्फ बुलु उर्फ गोरी और नयनतारा साहू उर्फ मिता उर्फ झूमा शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने पुलिस के सामने हथियार भी जमा किए। पुलिस के अनुसार, इनमें दो INSAS राइफल, एक AK-47, 10 मैगजीन और 154 राउंड गोलियां शामिल हैं।
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पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण
बुधवार को बांकुड़ा पुलिस कॉन्फ्रेंस हॉल में आत्मसमर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। तीनों ने पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी (वेस्टर्न जोन) आनंद कुमार के समक्ष संगठन छोड़ने की घोषणा की। कार्यक्रम में डीआईजी अभिषेक मोदी, बांकुड़ा एसपी वीजी सतीश पासुमार्थी समेत पुलिस के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस के मुताबिक, तीनों ने राज्य की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में भी सक्रियता का दावा
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले तीनों कमांडरों की गतिविधियां पश्चिम बंगाल के झारग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिम मेदिनीपुर के अलावा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम यानी कोल्हान क्षेत्र तक रही हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों के खिलाफ हत्या, यूएपीए तथा आर्म्स एंड एक्सप्लोसिव्स एक्ट समेत 80 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, हथियारों और गोलियों के साथ आत्मसमर्पण की यह कार्रवाई क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पति की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा संगठन पर दबाव
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाली जबा महतो उर्फ बुलु के पति मदन महतो को सरायकेला पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि बांकुड़ा और आसपास के इलाकों में लगातार चल रही कार्रवाई के बीच संगठन पर दबाव बढ़ा। इसी दौरान तीनों ने माओवादी संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण का फैसला किया। हालांकि, आत्मसमर्पण के पीछे की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की ओर से बताए गए तथ्यों को आधिकारिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया
आत्मसमर्पण के बाद तीनों के पुनर्वास और आगे की कानूनी प्रक्रिया राज्य की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत पूरी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नीति के प्रावधानों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों को उपलब्ध सुविधाओं और पुनर्वास प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। तीन कमांडरों के आत्मसमर्पण और हथियार जमा किए जाने के बाद अब पुलिस की नजर क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य लोगों पर भी है।






















