बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले RLM में घमासान
Bihar RLM Crisis: बिहार में 8 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भले ही किसी तरह की टूट से इनकार कर रहे हों, लेकिन पार्टी के तीन विधायकों का रुख अब सवाल खड़े कर रहा है। पटना में पत्रकारों ने जब उपेंद्र कुशवाहा से RLM में टूट को लेकर सवाल किया तो वह नाराज नजर आए। उन्होंने कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा है पत्रकार जी, आपका माथा भी टूट जाएगा।” उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट से इनकार किया और दावा किया कि विधान परिषद की सभी 8 सीटों पर एनडीए की जीत होगी।
Highlights:
सारण शिक्षक सीट पर RLM के तीन नेताओं का खुला विरोध
उपेंद्र कुशवाहा के दावे के बीच सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के भीतर अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। RLM के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा ने इस सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है। सारण शिक्षक सीट पर जेडीयू और एनडीए के आधिकारिक प्रत्याशी आनंद पुष्कर चुनाव मैदान में हैं। इसके बावजूद RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, विधायक दल के नेता माधव आनंद और विधायक रामेश्वर महतो ने रामपुकार सिन्हा के समर्थन का ऐलान किया है। तीनों नेताओं का यह रुख पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कुशवाहा के निर्देश के बावजूद बागी नेता के नामांकन में पहुंचे विधायक
उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन का ऐलान करते हुए पार्टी के नेताओं और विधायकों को उनके नामांकन में शामिल होने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन RLM के तीनों विधायकों ने जेडीयू प्रत्याशी के नामांकन में जाने के बजाय अपनी ही पार्टी के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा के नामांकन में हिस्सा लिया। इस घटनाक्रम ने RLM के भीतर नेतृत्व और विधायकों के बीच मतभेद को सामने ला दिया है। पार्टी के चार विधायकों में से तीन का अलग रुख सामने आने से एनडीए के भीतर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
माधव आनंद बोले- कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए उठाया कदम
पूरे विवाद पर RLM विधायक दल के नेता माधव आनंद ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं से बनती है, लेकिन पिछले कुछ समय से शीर्ष नेतृत्व के फैसलों के कारण कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे थे। माधव आनंद के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने कई जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं से बातचीत की थी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अपने मान-सम्मान की रक्षा की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा कि इसी भावना को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
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सम्राट चौधरी सरकार के समर्थन में रहने का दावा
माधव आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका रुख सरकार के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन में हैं और आगे भी समर्थन जारी रहेगा। ऐसे में विधान परिषद चुनाव से पहले RLM में सामने आया यह मतभेद NDA के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर उपेंद्र कुशवाहा पार्टी में टूट से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तीन विधायकों का अलग उम्मीदवार के समर्थन में उतरना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।






















