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Sunday, September 20, 2026

तेल गैस संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला…

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल-गैस आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए पूरे देश में ESMA यानी आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद अब स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन और ऊर्जा जैसी अहम सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हड़ताल करना गैरकानूनी माना जाएगा। सरकार का साफ संदेश है देश की जरूरी सेवाएं किसी भी हाल में ठप नहीं होने दी जाएंगी।

दरअसल हाल के दिनों में ईरान-इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा दी है। समुद्री रास्तों पर संकट की वजह से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे हालात में सरकार ने एहतियातन सख्ती दिखाते हुए ESMA लागू कर दिया है ताकि ऊर्जा, परिवहन और जरूरी सेवाओं की चेन किसी भी सूरत में न टूटे।

ESMA कोई नया कानून नहीं है। यह 1968 में संसद से पारित हुआ था और इसे खास तौर पर उन हालात में लागू किया जाता है जब जरूरी सेवाओं में हड़ताल से आम जनता की जिंदगी ठप होने का खतरा हो। इस कानून के तहत अधिकतम छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगाई जा सकती है। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी या संगठन इसके बावजूद हड़ताल करता है तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा और पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी भी कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने पहले ही तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं। इसके लिए ESMA के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है। मकसद साफ है अगर अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते हैं और आयात पर असर पड़ता है तो भी देश में रसोई गैस की कमी न होने पाए।

जानकार बताते हैं कि भारत के पास पर्याप्त तेलशोधन क्षमता है, लेकिन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी का घरेलू उत्पादन सीमित है। ऐसे में सरकार चाहती है कि रिफाइनरियां ज्यादा से ज्यादा एलपीजी तैयार करें ताकि आम लोगों की रसोई पर संकट न आए।

कुल मिलाकर सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि मौजूदा वैश्विक हालात में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। जरूरी सेवाओं को हर हाल में चालू रखना ही इस फैसले का मकसद है। अब देखना यह है कि यह सख्त कदम ऊर्जा संकट के असर को कितना काबू में रख पाता है।

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