पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की टीम शुक्रवार रात पटना पहुंच गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी रात 10 बजे यहां उतरे। यह दो दिवसीय यात्रा चुनाव तैयारियों की अंतिम समीक्षा के लिए है। यात्रा के बाद 6 या 7 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है।
राजनीतिक दलों से मुलाकात
शनिवार को CEC सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय व राज्य दलों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। यह बैठक पटना के होटल ताज सिटी सेंटर में होगी। भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस, लोजपा (रा), रालोजपा, माले, सीपीआई(एम) समेत कई दलों के नेताओं को बुलाया गया है। हर पार्टी से अधिकतम तीन प्रतिनिधि शामिल हो सकेंगे। बैठक में चुनाव की निष्पक्षता, पारदर्शिता पर सुझाव मांगे जाएंगे। दलों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी, आचार संहिता पालन, मतदान केंद्र बढ़ाने और ईवीएम सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाएंगे।
इसके बाद ECI टीम प्रमंडलीय आयुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और एसपी के साथ बैठक करेगी। मतदान केंद्रों पर सुविधाएं, महिलाओं व दिव्यांगों के लिए विशेष इंतजाम और सुरक्षा पर फोकस होगा।
रविवार को प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बैठक
रविवार को आयकर विभाग, ईडी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, एक्साइज व सीमा शुल्क विभाग के नोडल अधिकारियों से मुलाकात होगी। इनकी जिम्मेदारी होगी कि चुनाव में पैसे, शराब, ड्रग्स या अवैध सामग्री से वोट प्रभावित न हो। इसके अलावा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, राज्य पुलिस नोडल अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) प्रतिनिधियों व मुख्य सचिव, डीजीपी के साथ बैठकें होंगी। कानून-व्यवस्था, मतदान कर्मियों की तैनाती, मतगणना केंद्र सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर चर्चा होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और तारीखों का ऐलान
सभी बैठकों के बाद रविवार शाम ECI प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी, जिसमें तैयारियों की जानकारी साझा होगी। इसके तुरंत बाद या दिल्ली लौटने पर बिहार के 243 सीटों पर चुनाव तारीखों का ऐलान हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मतदान अक्टूबर-नवंबर में कई चरणों में होगा, संभवतः छठ पूजा (25-28 अक्टूबर) के बाद। पिछली बार पांच चरणों में चुनाव हुए थे। विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर
पूरे बिहार में सियासी हलचल तेज है। सत्ता पक्ष विकास योजनाओं व सौगातों से वोटरों को लुभा रहा है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार के मुद्दे उठा रहा है। गांव-शहर से लेकर सोशल मीडिया तक तारीखों की चर्चा जोरों पर है। एनडीए अपनी उपलब्धियों पर दावा कर रहा है, तो महागठबंधन व जन सुराज पार्टी बदलाव का नारा दे रही हैं।





















