Digital Payment MDR: देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में उच्च मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन पर चरणबद्ध तरीके से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लगातार सरकारी वित्तीय सहायता पर निर्भर रखने के बजाय ऐसा राजस्व मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे भुगतान सेवा प्रदाताओं और डिजिटल पेमेंट नेटवर्क की परिचालन जरूरतें पूरी हो सकें।
Highlights:
बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की सिफारिश
MDR वह शुल्क है, जो किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने पर व्यापारी की ओर से बैंक या पेमेंट प्रोसेसर को दिया जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि छोटे व्यापारियों और कम मूल्य के लेनदेन को सुरक्षित रखते हुए बड़े डिजिटल भुगतान पर चरणबद्ध तरीके से MDR लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट में मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था के कारण सरकार पर बढ़ते वित्तीय दबाव का भी उल्लेख किया गया है। समिति के मुताबिक डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ इसके बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और संचालन पर होने वाली लागत को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सरकार की सब्सिडी से जुड़ी वित्तीय चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले BHIM-UPI लेनदेन से जुड़े नुकसान की भरपाई के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। समिति ने इस व्यवस्था की दीर्घकालिक वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर चिंता जताई है। समिति के मुताबिक डिजिटल भुगतान उद्योग की वास्तविक परिचालन लागत की तुलना में यह सहायता सीमित है। ऐसे में भुगतान नेटवर्क के साइबर सुरक्षा उपायों, धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था और तकनीकी बुनियादी ढांचे में जरूरी निवेश प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
छोटे व्यापारियों और P2P ट्रांसफर को राहत देने पर जोर
समिति ने स्पष्ट किया है कि MDR का ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। इसी तरह व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर को भी सुरक्षित रखने की बात कही गई है। समिति ने बड़े डिजिटल लेनदेन के लिए पारदर्शी और स्तरीकृत राजस्व मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के पूरे इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत करना है, जबकि छोटे दुकानदारों और आम उपयोगकर्ताओं पर असर को सीमित रखा जा सके।
डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
समिति के सुझावों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल तैयार करना है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि देश में डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रखते हुए उसके संचालन और सुरक्षा से जुड़ी लागत का स्थायी समाधान भी जरूरी है। हालिया विधायी बदलावों के बाद सरकार और अधिकृत संस्थाओं के लिए UPI तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क से जुड़ी व्यवस्था बनाने का रास्ता भी खुला है। ऐसे में आने वाले समय में बड़े डिजिटल लेनदेन पर MDR को लेकर नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।






















