अतिपिछड़ा वर्ग के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा हेतु निम्नलिखित 10 ऐतिहासिक कदम उठाए जाएंगे:
- अत्याचार से सुरक्षा:
‘अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम’ पारित कर, सामाजिक अन्याय और उत्पीड़न के विरुद्ध कानूनी संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। - राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बढ़ोत्तरी:
पंचायत एवं नगर निकायों में अतिपिछड़ों के लिए आरक्षण को 20% से बढ़ाकर 30% किया जाएगा। - आरक्षण की संवैधानिक गारंटी:
आबादी के अनुपात में आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कानून बनाकर उसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुशंसा केंद्र को भेजी जाएगी। - चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता:
सरकारी नियुक्तियों में “Not Found Suitable (NFS)” जैसे अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण प्रावधान को अवैध घोषित किया जाएगा। - सूची की समीक्षा हेतु समिति:
अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अधिक समावेशन (under-/over-inclusion) के मामलों की समीक्षा के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी। - आवासीय अधिकार:
अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के भूमिहीन आवासीय परिवारों को- शहरी क्षेत्रों में 3 डेसिमल,
- ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डेसिमल भूमि दी जाएगी।
- शिक्षा में समावेश:
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2010) के अंतर्गत निजी विद्यालयों की आरक्षित सीटों का 50% हिस्सा
EBC, OBC, SC, ST के बच्चों के लिए सुरक्षित किया जाएगा। - आर्थिक सशक्तिकरण:
25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों और आपूर्ति कार्यों में 50% आरक्षण
EBC, OBC, SC, ST वर्गों के लिए सुनिश्चित किया जाएगा। - निजी शिक्षा संस्थानों में आरक्षण:
संविधान की धारा 15(5) के तहत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाएगा। - आरक्षण की निगरानी और नियंत्रण:
एक उच्च अधिकार प्राप्त ‘आरक्षण नियामक प्राधिकरण’ का गठन किया जाएगा।
जातीय आरक्षण सूची में किसी भी बदलाव के लिए विधान मंडल की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।





















