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Thursday, August 27, 2026

नवरात्रि 2025: शारदीय नवरात्रि का पहला दिन.. जेन मां शैलपुत्री पूजा विधि, भोग, आरती…

आज यानी 22 सितंबर को मां दुर्गे के सबसे पवित्र दिन शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. आज मां भक्त कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा करेंगे. शारदीय नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करने का विधान है. इस साल भी शारदीय नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिनों की है. बता दें कि, नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा करते हैं. नोएडा के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजन का महत्व क्या है? शैलपुत्री को कौन से भोग लगाएं? किन मंत्रों के जप से प्रसन्न होंगी मां शैलपुत्री?

पूजन विधि

1. स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें (मां को पीला रंग प्रिय है)।

2. पूजा स्थान को स्वच्छ करें और चौकी पर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

कलश स्थापना करें:

कलश पर नारियल और आम/पान के पत्ते रखें।

स्वास्तिक बनाएं और गंगाजल या साफ जल से कलश भरें।

अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।

मंत्र जाप करें: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्र्यै नमः”

मां को सफेद फूल अर्पित करें।

मंत्र जाप (Maa Shailputri Mantra)

1. बीज मंत्र: “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।”

2. स्तोत्र: “या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।”

3. ध्यान मंत्र:”वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”

मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
बहुत समय पहले की बात है जब प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया. दक्ष ने इस यज्ञ में सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन अपनी बेटी सती और पति भगवान शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाया. सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने के लिए बेचैन हो उठीं. इसपर भगवान शिव ने सती से कहा कि अगर प्रजापति ने हमें यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया है तो ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है. लेकिन इसके बाद सती की जिद को देखकर शिवजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की स्वीकृति दे दी.

भोग – मां शैलपुत्री को क्या चढ़ाएं?

सफेद मिठाइयाँ — खीर, सफेद बर्फी, मावा लड्डू

गाय के घी से बना हलवा

फल व मिश्री

मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार, करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी, तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे, जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू, दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी, आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो, सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के, गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं, प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अम्बे, शिव मुख चंद्र चकोरी अम्बे।
मनोकामना पूर्ण कर दो, भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी।

शैलपुत्री पूजा का महत्व

मां शैलपुत्री की पूजा से चंद्र दोष दूर होता है।

जीवन में शांति, मानसिक संतुलन, और शक्ति प्राप्त होती है।

शिव-पार्वती के मिलन का यह प्रारंभिक स्वरूप है, जो साधना की शुरुआत है।

 

 

 

 

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