NMC MBBS Time Limit, जमशेदपुर: मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अहम बदलाव किया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को अपनी पूरी शैक्षणिक पढ़ाई और अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करने के लिए अधिकतम 10 वर्ष का समय मिलेगा। पहले यह समय-सीमा 9 वर्ष निर्धारित थी। एनएमसी ने देशभर के मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर नए प्रावधान की जानकारी दे दी है। इस बदलाव से उन विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पढ़ाई बीमारी, पारिवारिक परेशानी या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण प्रभावित हो जाती है।
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कोल्हान के मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को भी लाभ
एनएमसी के इस फैसले का असर जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज के अलावा निजी क्षेत्र के मणिपाल मेडिकल कॉलेज और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। इन संस्थानों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे सैकड़ों छात्रों को अब पाठ्यक्रम और इंटर्नशिप पूरी करने के लिए पहले की तुलना में एक अतिरिक्त वर्ष का समय उपलब्ध होगा। हालांकि, यह सुविधा निर्धारित शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी नियमों के अधीन रहेगी।
प्रथम वर्ष में प्रवेश की तारीख से शुरू होगी गणना
एनएमसी ने अपने दिशा-निर्देशों में समय-सीमा की गणना को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। 10 वर्ष की अवधि की गणना काउंसलिंग या सीट आवंटन की तारीख से नहीं की जाएगी। यह अवधि उस दिन से मानी जाएगी, जिस दिन विद्यार्थी आधिकारिक रूप से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षा में शामिल होगा। इस अवधि के भीतर छात्र को साढ़े चार वर्ष का अकादमिक पाठ्यक्रम और एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। इस तरह कुल 10 वर्ष की सीमा में पढ़ाई और इंटर्नशिप दोनों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
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प्रथम वर्ष की परीक्षा में चार अवसर का नियम जारी
कुल समय-सीमा में एक वर्ष की वृद्धि किए जाने के बावजूद एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्रों को प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार अवसर ही मिलेंगे। यदि कोई विद्यार्थी चार प्रयासों के बाद भी प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता है, तो उसे आगे की मेडिकल पढ़ाई जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका मतलब है कि बढ़ी हुई 10 वर्ष की समय-सीमा अतिरिक्त परीक्षा प्रयासों की अनुमति नहीं देती। यह प्रावधान केवल उन परिस्थितियों में मददगार होगा, जब किसी छात्र की पढ़ाई निर्धारित समय में पूरी नहीं हो पाती।
गंभीर परिस्थितियों में छात्रों को मिलेगी राहत
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उमाशंकर सिंह के अनुसार, कई बार गंभीर बीमारी, पारिवारिक दुर्घटना या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण योग्य विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त एक वर्ष छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने का अवसर दे सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम की मूल अवधि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। छात्रों को परीक्षा, उपस्थिति, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप से जुड़े सभी अनिवार्य मानकों को पूरा करना होगा। एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिया है कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को संशोधित नियमों और समय-सीमा की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।






















