Onion Crisis: कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसानों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने प्याज की खरीद कीमत (MSP) बढ़ा दी है। हालांकि, इस कदम के बावजूद खरीद की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है, जिससे केंद्र सरकार और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की चिंता बढ़ गई है।
Highlights:
MSP में पांच बार बढ़ोतरी के बावजूद खरीद कम
सरकार ने पिछले दो महीनों में प्याज की MSP पांच बार बढ़ाई है। फिर भी, सरकारी खरीद की रफ्तार बहुत धीमी है। केंद्र सरकार ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 5 प्रतिशत खरीद ही पूरी हो पाई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जताई चिंता
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने खरीद में देरी और लक्ष्य पूरा न होने पर चिंता जताई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मौसम की वजह से खरीफ की फसल को नुकसान होता है और भविष्य में कीमतें बढ़ती हैं, तो बफर स्टॉक कम होने से जमाखोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जल्द ही खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर चर्चा होने की संभावना है।
खरीद कीमत ₹21.25 प्रति किलोग्राम की गई
सरकार ने हाल ही में प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर ₹21.25 प्रति किलोग्राम कर दी है। इसके अलावा, ज्यादा किसानों से खरीद सुनिश्चित करने के लिए खरीद की अवधि 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है।
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किसान सरकार को प्याज क्यों नहीं बेच रहे हैं?
महाराष्ट्र प्याज किसान संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले के अनुसार, प्याज की मौजूदा बाजार कीमतें सरकारी खरीद दर से अधिक हैं। नतीजतन, किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय थोक बाजारों (मंडियों) में बेच रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसान कम कीमतों पर बेचने को मजबूर थे, तब सरकारी खरीद सीमित थी, एक ऐसा कारक जिसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।






















