पटना: बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन और सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले, विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक घोटाले के मुद्दे पर विधानसभा के बाहर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। महागठबंधन में शामिल सभी पार्टियों के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) ने शहीद स्मारक से विधानसभा तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
Highlights:
शहीद स्मारक से विधानसभा तक पैदल मार्च

जैसे ही मॉनसून सत्र शुरू हुआ, महागठबंधन के नेताओं ने शहीद स्मारक से विधानसभा तक पैदल मार्च किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, विपक्षी नेताओं ने केंद्र और बिहार दोनों सरकारों के खिलाफ नारे लगाए और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया।
प्लेकार्ड के ज़रिए इस्तीफे और जवाबदेही की मांग

विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने ऐसे प्लेकार्ड पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें,” “पेपर लीक का जवाब दें,” और “छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करें।” विपक्ष ने आरोप लगाया कि बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है और सरकार इस मामले में जवाबदेही से बच रही है।
महागठबंधन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि सरकार को छात्रों के भविष्य पर असर डालने वाले मुद्दों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार लापरवाही सामने आई है ऐसी स्थिति जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। RJD विधायक गौतम कृष्णा और रणविजय साहू ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे को उठाने का मकसद छात्रों से जुड़ी चिंताओं को सदन और सरकार के सामने प्रमुखता से रखना था।
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पांच दिन का मॉनसून सत्र; और टकराव के संकेत
बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र पांच दिनों का है और यह 24 जुलाई तक चलेगा। विरोध प्रदर्शन के इस शुरुआती दिन के बाद, संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच सदन के अंदर और बाहर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।






















