Rajganj Karam Mahotsav: बागदाहा स्थित विनोद बिहारी महतो स्टेडियम में सोमवार को हलधर महतो के नेतृत्व में भव्य करम अखाड़ा का आयोजन किया गया। करम महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से पहुंचीं हजारों करम नृत्य टीमों ने पारंपरिक वेशभूषा में शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के दौरान ढोल-मांदर की थाप, पारंपरिक गीतों और लोकनृत्य से स्टेडियम परिसर गूंज उठा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आयोजन में भाग लिया और झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का आनंद उठाया।
Highlights:
सुदेश महतो समेत कई नेता हुए शामिल
करम अखाड़ा कार्यक्रम में आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मंटू महतो समेत कई स्थानीय नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने करम पर्व की सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पारंपरिक परंपराओं को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक लोक संस्कृति पहुंचाने पर जोर दिया गया।
करम नृत्य टीमों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां
करम महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों से आई नृत्य टीमों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने पारंपरिक परिधान पहनकर गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से करम पर्व की जीवंत झलक प्रस्तुत की। प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को आयोजकों की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
पहाड़पुर में भी हुआ 1932 खतियान आधारित करम महोत्सव
राजगंज के बागदाहा के अलावा पहाड़पुर में भी 1932 खतियान आधारित करम महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और गिरधारी महतो समेत कई प्रमुख लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में करम पर्व की परंपराओं के साथ-साथ झारखंडी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी गई। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।

लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश
दोनों आयोजनों में झारखंडी लोक संस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत और करम पर्व की परंपराओं का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। करम महोत्सव के माध्यम से सामाजिक एकजुटता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश भी सामने आया। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्व की खुशियां साझा कीं। आयोजकों और स्थानीय लोगों ने ऐसे आयोजनों को आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।























