निरसा: संसार प्रकाश और शब्द से चलता है। जीवन भी प्रकाश और शब्द से ही चलता है। इसीलिए संसार की सृष्टि में मुख्य भूमिका प्रकाश और शब्द का ही है। वैदिक सनातन धर्म का यह मूल है इसी के आधार पर भारत ने विश्व गुरु की ख्याति प्राप्त की थी। उक्त बातें निरसा पंजाबी मिलन में संतमत सत्संग द्वारा रविवार को आयोजित सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी शिवनारायण महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन धर्म में इसका प्रत्येक मंदिरों में प्रकाश और शब्द का प्रतीक देकर बाह्य जगत में ठहर गए। आंतरिक साधना को भूलकर पूजा पाठ बाह्य उपकरणों में फंस गए। अगर आत्मज्ञान प्राप्त करना हो तो आंतरिक प्रकाश और शब्द की जरूरत है। परमात्मा को जानने के लिए अंदर में बिंदु ध्यान और नाद की उपासना की आवश्यकता है। ऐसा सभी संतों एवं ऋषि मुनियों का कहना है। आज के सत्संग का मुख्य विषय यही है।
उन्होंने कहा कि तीन आनंद संसार में है। बिषयानंद, भजन आनंद एवं परमानंद । इसमें सबसे महत्वपूर्ण परमानंद है। जो हमें परमात्मा से मिलना है। आज के मनुष्य विषय वासना में मत हो गए हैं इस कारण उन्हें परमानंद की प्राप्ति नहीं हो रही है।
सत्संग को पाकुड़ से आए स्वामी किशोरानंद देवघर से आए स्वामी अभिषेकानंद, दिलीप बाबा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आनंद बरनवाल, नैना बरनवाल, काजल बरनवाल, अर्चना बरनवाल, आभा देवी, रघुवीर प्रसाद मंडल, जयशंकर ठाकुर, बालमुकुंद प्रसाद, ईश्वर प्रसाद इत्यादि की भूमिका रही।






















