Tundi Palma Elephant Terror, धनबाद: धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर स्थित टुंडी के पलमा गांव में पिछले दो दिनों से 39 हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। हाथियों का झुंड गांव में घुसकर घरों, फसलों और घरों में रखे अनाज को नुकसान पहुंचा रहा है। हाथियों की गतिविधियों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोग अपने घर और रोजी-रोटी को बचाने के लिए चिंतित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के गांव में प्रवेश करते ही उन्हें खदेड़ने के लिए मशालची बुलाने पड़ते हैं।
Highlights:
करीब 9 घरों को नुकसान, महिला की कमर टूटी
हाथियों के झुंड ने अब तक करीब 9 घरों को नुकसान पहुंचाया है। कई परिवारों के घरों में रखा अनाज बर्बाद हो गया, जबकि खेतों में लगी फसलों को भी हाथियों ने रौंद दिया। इसी दौरान हाथियों से बचकर भागने के क्रम में एक महिला घायल हो गई। बताया जा रहा है कि महिला की कमर टूट गई है। घटना के बाद प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन घरों में पहले चूल्हा जलता था, वहां अब टूटे सामान और बिखरा हुआ अनाज दिखाई दे रहा है। अधिकांश प्रभावित परिवार आदिवासी समुदाय से जुड़े हैं।

ग्रामीणों ने मांगा राहत और स्थायी समाधान
ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि नुकसान के बाद राहत और मुआवजे की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि हर बार हाथियों के आने पर तत्काल राहत की बात होती है, लेकिन स्थायी समाधान पर पर्याप्त काम नहीं किया जाता। पूर्व जिला परिषद सदस्य राय मुनि देवी ने भी प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल राहत, मुआवजा और हाथियों से बचाव के लिए ठोस व्यवस्था करने की मांग की। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या वन विभाग की टीम हाथियों के गांव में प्रवेश करने से पहले सक्रिय निगरानी नहीं कर सकती थी।
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विधायक मथुरा महतो ने बांटी राहत सामग्री
ग्रामीणों की परेशानी की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को टुंडी विधायक मथुरा महतो पलमा पहुंचे। उन्होंने हाथियों से प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। विधायक ने वन विभाग के रेंजर और स्थानीय ग्रामीणों के साथ बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुआवजा दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल करने का भरोसा दिया। मथुरा महतो ने लंबे समय से प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर के निर्माण को लेकर सरकार से बातचीत तेज करने की बात भी कही।

एलिफेंट कॉरिडोर से स्थायी समाधान की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि केवल राहत सामग्री बांटने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने और प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। पलमा समेत आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता है कि हाथियों का झुंड आज चला भी जाए, तो भविष्य में दोबारा लौट सकता है। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा, फसल बचाव और मुआवजा व्यवस्था को लेकर ठोस योजना जरूरी है। फिलहाल पलमा के ग्रामीण दहशत के माहौल में रात गुजार रहे हैं। उनकी मांग है कि वन विभाग और जिला प्रशासन तत्काल प्रभावी कदम उठाए, ताकि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।























