21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात से बढ़ी बहस
UCC Bihar 2026: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि कई राज्यों में UCC पहले ही पेश किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। अमित शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों और NDA के कुछ सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। UCC के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था की बात की जाती है।
Highlights:
ओवैसी ने UCC को लेकर सरकार पर साधा निशाना
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के जरिए गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश की जा रही है। भोपाल में अपनी पार्टी की रैली के दौरान ओवैसी ने सरकार को आदिवासी समुदायों के संदर्भ में भी चुनौती दी और UCC को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार लगातार मुसलमानों को निशाना बनाती है। ओवैसी का यह बयान अमित शाह के 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद आया है। UCC को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां मुख्य रूप से धार्मिक और आदिवासी समुदायों की अलग-अलग परंपराओं तथा व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मुद्दों पर रही हैं।
बिहार में JDU की बैठक, UCC पर चर्चा की संभावना
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में भी UCC को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी है। JDU ने 18 सितंबर को पटना में अपने सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है। बैठक में UCC के साथ फरक्का जल संधि समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। बैठक से पहले JDU नेता विजय चौधरी ने कहा कि पार्टी UCC के प्रावधानों और उससे जुड़ी आशंकाओं को समझने के बाद अपना रुख तय करेगी। JDU का रुख यह रहा है कि UCC पर व्यापक चर्चा और सहमति के बाद आगे बढ़ना चाहिए। JDU की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी NDA का हिस्सा है, जबकि UCC को लेकर उसके नेताओं की ओर से अलग-अलग स्तर पर अपनी राय सामने आती रही है। हालिया रिपोर्टों में JDU के राष्ट्रीय स्तर पर UCC के प्रति सैद्धांतिक रुख और बिहार में इसके क्रियान्वयन को लेकर अलग दृष्टिकोण की चर्चा हुई है।
किन राज्यों में UCC की स्थिति क्या है?
UCC को लेकर राज्यों की स्थिति एक जैसी नहीं है। उत्तराखंड में UCC जनवरी 2025 से लागू है। वहीं गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाएं UCC से जुड़े कानून पारित कर चुकी हैं। इन राज्यों के कानूनों में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषयों के साथ कुछ जगहों पर लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और बहुविवाह पर रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन कानूनों में अनुसूचित जनजातियों को छूट दिए जाने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि UCC पर चर्चा केवल धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों की customary practices और संवैधानिक संरक्षण भी बहस का हिस्सा हैं। पश्चिम बंगाल में भी UCC को लेकर सरकार की ओर से जल्द विधानसभा में विधेयक लाने की बात कही गई है। वहीं अन्य राज्यों में इसे लेकर तैयारी या राजनीतिक चर्चा अलग-अलग स्तर पर चल रही है।
UCC पर आगे क्या होगा?
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। हालांकि यह प्रावधान नीति-निर्देशक तत्वों में आता है और सीधे तौर पर अदालत में लागू कराने योग्य मौलिक अधिकार नहीं है। अब अमित शाह के 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद राज्यों की भूमिका और NDA सहयोगी दलों के रुख पर नजर रहेगी। बिहार में JDU की प्रस्तावित बैठक के बाद पार्टी की ओर से सामने आने वाला आधिकारिक रुख इस बहस को और स्पष्ट कर सकता है।






















