नई दिल्ली: मानसून के मौसम में पंख फैलाकर नाचते मोर का दृश्य हर किसी का मन मोह लेता है। वर्षों से लोग इसे बारिश के आगमन और प्रकृति के उल्लास से जोड़कर देखते आए हैं। भारतीय संस्कृति, लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं में भी मोर के नृत्य का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसके पीछे एक स्वाभाविक जैविक कारण छिपा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में मोर का नृत्य मुख्य रूप से उसके प्रजनन व्यवहार से जुड़ा होता है। मानसून मोरों के लिए प्रजनन का सबसे अनुकूल समय माना जाता है। इस दौरान नर मोर अपने रंग-बिरंगे और आकर्षक पंखों को फैलाकर मादा मोरनी को आकर्षित करने का प्रयास करता है। उसका नृत्य जितना प्रभावशाली और ऊर्जावान होता है, साथी चुने जाने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नृत्य केवल आकर्षण का माध्यम नहीं, बल्कि नर मोर की शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का प्रदर्शन भी होता है। चमकदार पंख, संतुलित आकार और सक्रिय व्यवहार यह संकेत देते हैं कि पक्षी स्वस्थ और मजबूत है। मादा मोरनी अक्सर इन्हीं विशेषताओं के आधार पर अपने साथी का चयन करती है।
मानसून के दौरान मौसम में ठंडक और नमी बढ़ने से मोरों की सक्रियता भी बढ़ जाती है। लंबे समय तक गर्मी झेलने के बाद बारिश उन्हें अधिक ऊर्जा और अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। यही कारण है कि इस मौसम में मोर अधिक बार नृत्य करते दिखाई देते हैं।
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इसके अलावा बारिश के समय कीड़े-मकोड़ों, केंचुओं और अन्य खाद्य स्रोतों की उपलब्धता भी बढ़ जाती है। पर्याप्त भोजन मिलने से मोरों को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है, जो उनके प्रजनन और अन्य गतिविधियों में सहायक होती है। हालांकि आम धारणा यह है कि मोर बारिश की खुशी में नाचता है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यवहार मुख्य रूप से प्रजनन, अनुकूल मौसम और जीवित रहने की प्राकृतिक प्रक्रिया से जुड़ा है। फिर भी बारिश की बूंदों के बीच पंख फैलाकर नाचते मोर का दृश्य प्रकृति की सबसे खूबसूरत तस्वीरों में से एक माना जाता है।






















