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Tuesday, October 27, 2026

जेपी अस्पताल जशपुर में इलाज के दौरान विवाहिता की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, डॉक्टर बोले – संक्रमण बना जानलेवा…

निरसा: निरसा थाना क्षेत्र के मदनडीह पंचायत अंतर्गत यशपुर स्थित जेपी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक विवाहिता की मौत का मामला सामने आया है। मृतका पिछले 20 दिनों से अस्पताल में भर्ती थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही और पैसे को लेकर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

मिली जानकारी के अनुसार, निरसा थाना क्षेत्र की रहने वाली विवाहिता पिछले 20 दिनों से यशपुर स्थित जेपी हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी, जहां आज इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों में कोहराम मच गया।
मृतका की मां रूमा देवी ने रोते-बिलखते हुए बताया कि उनकी बेटी ससुराल में आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गई थी। पहले उसका इलाज धनबाद और बोकारो में कराया गया, जिसके बाद 20 दिन पूर्व उसे जेपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

रूमा देवी का आरोप है कि इलाज के नाम पर अब तक अस्पताल में करीब डेढ़ लाख रुपये जमा कर दिए गए थे, लेकिन ससुराल पक्ष की ओर से कुछ राशि बकाया रह गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बकाया पैसे को लेकर अस्पताल प्रबंधन दबाव बना रहा था। रूमा देवी के अनुसार,
“कल रात मैंने डॉक्टर के सामने हाथ-पैर जोड़े कि मेरी बेटी को बचा लीजिए, लेकिन पैसों की बात को लेकर मेरी एक नहीं सुनी गई और समय पर सही इलाज नहीं मिला, जिसके कारण आज मेरी बेटी की मौत हो गई।”

वहीं दूसरी ओर, जेपी हॉस्पिटल के डॉक्टर पार्थो आचार्य ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति शुरुआत से ही अत्यंत नाजुक थी। भर्ती के समय ही परिजनों को मरीज को हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए लिखित में यहीं इलाज कराने का अनुरोध किया था।

डॉ. पार्थो आचार्य के अनुसार, इलाज के दौरान मरीज की हालत में कुछ सुधार भी हुआ था, लेकिन अत्यधिक संक्रमण के कारण पिछले तीन दिनों से स्थिति फिर गंभीर हो गई। उन्होंने कहा कि मरीज को दोबारा रेफर किया गया था, लेकिन परिजन उसे बाहर ले जाने को तैयार नहीं हुए।
डॉ. आचार्य ने बताया, “संक्रमण इतना बढ़ गया था कि एंटीबायोटिक का लोड देना भी संभव नहीं था। मानवता के नाते हमने हर संभव प्रयास किया।”

डॉ. पार्थो आचार्य ने मीडिया के सामने भर्ती के समय परिजनों द्वारा दिए गए लिखित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए और स्पष्ट किया कि एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से मरीज को बचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए जा रहे लापरवाही के आरोप तथ्यहीन हैं।
फिलहाल इस मामले को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।

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