धनबाद: एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कॉलेज का माहौल पूरी तरह आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा पहनकर नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी।
Highlights:
ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमीं छात्राएं
कार्यक्रम के दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर आदिवासी गीत गूंजते रहे। छात्राओं की प्रस्तुतियों में झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में छात्राओं ने अलग-अलग नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। हर प्रस्तुति में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और झारखंड की मिट्टी से जुड़ाव दिखाई दिया।
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PPT के जरिए दिखाया आदिवासी जीवन और संघर्ष
कार्यक्रम में सिर्फ गीत और नृत्य ही नहीं, बल्कि छात्राओं ने PPT Presentation के माध्यम से आदिवासी समाज के जीवन, इतिहास और संघर्ष को भी प्रस्तुत किया। इसके जरिए छात्राओं ने आदिवासी समाज की परंपराओं और उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। शिक्षकों ने भी कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के योगदान और प्रकृति के साथ उनके गहरे रिश्ते पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के संरक्षण के प्रति लंबे समय से सजग रहा है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का महत्व भी कार्यक्रम के माध्यम से बताया गया।

9 अगस्त को मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस
विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है। इस वर्ष 9 अगस्त रविवार होने के कारण SSLNT महिला महाविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन एक दिन पहले किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने कहा कि आदिवासी समाज से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहने और सादगी से जीवन जीने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समझना और उनका सम्मान करना जरूरी है।

संस्कृति को सहेजने का दिया संदेश
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा। आयोजन के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति समाज की जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। SSLNT महिला महाविद्यालय का यह आयोजन इस बात पर केंद्रित रहा कि आदिवासी जीवन और संस्कृति से मिलने वाली सीख को समझा जाए तथा उनकी समृद्ध विरासत को सहेजने और सम्मान देने की दिशा में प्रयास किए जाएं।























