समस्तीपुर: भारतीय रेलवे ने ईस्ट सेंट्रल रेलवे के समस्तीपुर डिवीजन में 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिस्टम लगाने की मंज़ूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल ₹233 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत, मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम की जगह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग टेक्नोलॉजी लगाई जाएगी। रेलवे के अनुसार, इससे डिवीजन का सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत होगा।
Highlights:
इन 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाई जाएगी
मंज़ूर किए गए प्रोजेक्ट के तहत, कई स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जिनमें मधुबनी, अंगार घाट, बदला घाट, धमारा घाट, रुसेरा घाट, रामगढ़वा, भगवानपुर देसुआ, नरहन और नया नगर शामिल हैं। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में राजनगर, सलोना, इमली, ओलापुर, कोपरिया, सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा कचहरी, पंडौल, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा, बैजनाथपुर, बुधमा और मुरलीगंज स्टेशन भी शामिल हैं। रेलवे का मकसद इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाकर ऑपरेशन को ज़्यादा सुरक्षित और कुशल बनाना है।
‘कवच’ सिस्टम को लागू करने में मदद
रेलवे के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ को लागू करने में भी आसानी होगी। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम होने से चुने गए स्टेशनों पर ‘कवच’ से जुड़े कामों के लिए बेहतर तकनीकी आधार तैयार होगा। इसे रेलवे सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम क्या है?
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक आधुनिक रेलवे सिग्नलिंग टेक्नोलॉजी है। यह पुराने रिले-बेस्ड इंटरलॉकिंग सिस्टम की जगह कंप्यूटर-बेस्ड सिस्टम का इस्तेमाल करती है। रेलवे के अनुसार, यह टेक्नोलॉजी सिग्नलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता को बढ़ाती है। इससे तकनीकी खराबी को जल्दी ठीक करने, मेंटेनेंस को आसान बनाने और ट्रेन ऑपरेशन को ज़्यादा बेहतर ढंग से मैनेज करने में भी मदद मिलती है।
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रेलवे सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर
भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। समस्तीपुर डिवीजन में 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने की मंज़ूरी इसी दिशा में एक अहम कदम है। उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से रेलवे सुरक्षा के उपाय मज़बूत होंगे और ट्रेन ऑपरेशन की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल ‘कवच’ (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के भविष्य में विस्तार में मदद करेगा।






















