धनबाद: झरिया इलाके से BCCL की नौकरी को लेकर एक विवाद सामने आया है। एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर धरना दिया है। झरिया के कुस्तौर नंबर 3 के रहने वाले रामू तुरी का दावा है कि अपने मामा की मौत के बाद, उन पर आश्रित होने के नाते उन्हें BCCL में नौकरी मिलनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि किसी और व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके और उनकी पहचान का गलत फायदा उठाकर वह नौकरी हासिल कर ली।
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ड्यूटी के दौरान मामा की मौत; नौकरी पर दावा

रामू तुरी के मुताबिक, उनके मामा होरलाडीह इलाके में BCCL के लिए पंप खलासी के तौर पर काम करते थे। ड्यूटी के दौरान एक हादसे में उनकी मौत हो गई थी। रामू तुरी का कहना है कि उनके मामा की कोई संतान नहीं थी और उन्होंने उन्हें गोद लिया था। इसी आधार पर, वे मृतक कर्मचारी पर आश्रित होने के नाते नौकरी पर अपना हक जताते हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट में आश्रित-आधारित नौकरी और नौकरी के अधिकार से जुड़े दस्तावेजों की कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि फुसबंगला के रहने वाले रामू साव नाम के एक व्यक्ति ने रामू तुरी बनकर BCCL की नौकरी हासिल कर ली। रामू तुरी का कहना है कि इस मामले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। उनका दावा है कि उन्होंने कई बार BCCL अधिकारियों से शिकायत की है और मामला कोर्ट तक भी पहुंचा है। इन आरोपों के संबंध में संबंधित व्यक्ति और BCCL प्रबंधन से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
नौकरी का दावेदार अब रिक्शा चलाता है
रामू तुरी का कहना है कि अपने अधिकारों के लिए सालों तक लड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें रिक्शा चलाने पर मजबूर होना पड़ा है। उनका आरोप है कि BCCL के कई अधिकारियों से गुहार लगाने और दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है। इसके बाद, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ रणधीर वर्मा चौक पर धरना देने का फैसला किया। दंपत्ति ने मांग की है कि प्रशासन और BCCL प्रबंधन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय सुनिश्चित करें।
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नौकरी के विवाद की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है। यह बात तभी साफ़ हो पाएगी जब इस बात की जाँच की जाएगी कि BCCL की फ़ाइलों में नौकरी किसके नाम पर दर्ज है और नियुक्ति किन दस्तावेज़ों के आधार पर की गई थी। अगर नियुक्ति प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या जाली दस्तावेज़ों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने का मामला भी उठेगा। फिलहाल, रामू टुरी और उनकी पत्नी न्याय की माँग के लिए धरने के ज़रिए अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। मामले की असल सच्चाई BCCL के आधिकारिक रिकॉर्ड की जाँच, तहकीकात और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही साफ़ हो पाएगी।






















