मुज़फ़्फ़रपुर: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने डस्टबिन खरीद मामले में मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के साथ-साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की भूमिका की भी जांच की मांग की है। 2 सितंबर को मुज़फ़्फ़रपुर में जन सुराज की ओर से जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, किशोर ने कहा कि डस्टबिन खरीदने की प्रक्रिया तब शुरू हुई थी जब तेजस्वी यादव बिहार के स्वास्थ्य मंत्री थे। किशोर ने मंगल पांडे के अलावा इस मामले में तेजस्वी यादव की भूमिका की भी जांच की मांग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पूरे मामले की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए और जो भी इसमें शामिल पाया जाए, उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
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डस्टबिन खरीद मामले में तेजस्वी की भूमिका की जांच की मांग
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि डस्टबिन खरीद की प्रक्रिया तेजस्वी यादव के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए शुरू हुई थी। इसी आधार पर उन्होंने तर्क दिया कि जांच सिर्फ़ मंगल पांडे तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने डस्टबिन खरीद के मुद्दे पर व्यापक जांच की मांग की और ज़ोर दिया कि उस दौरान ज़िम्मेदार पदों पर रहे सभी लोगों की भूमिका को जांच के दायरे में लाया जाए। हालाँकि, ये बातें प्रशांत किशोर के आरोप और मांगें हैं; प्रेस नोट में इस मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
प्रशांत किशोर ने दिल्ली में एक मंत्री से जुड़ी कथित घटना पर भी बात की
प्रशांत किशोर ने दिल्ली में बिहार सरकार के एक मंत्री से जुड़ी कथित घटना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने उन रिपोर्टों का ज़िक्र किया जिनमें कहा गया है कि दिल्ली में एक मंत्री पर एक युवती के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा और बाद में उनकी चप्पलों से पिटाई की गई। उन्होंने इस कथित घटना के आलोक में बिहार सरकार के कामकाज के तरीके और उसके राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाए। किशोर ने कहा कि जब सरकार का मुखिया दागदार या आपराधिक चरित्र का होता है, तो मंत्रियों, विधायकों और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों से जुड़ी ऐसी घटनाओं की खबरें सुनने को मिलेंगी ही।
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प्रशांत किशोर ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए
डस्टबिन खरीद मामले और दिल्ली में मंत्री से जुड़ी कथित घटना पर अपने बयानों के ज़रिए प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के आचरण पर भी टिप्पणी की। जन सुराज की ओर से जारी एक प्रेस नोट में दोनों मामलों में सरकार और संबंधित नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, प्रेस नोट में दिल्ली में एक मंत्री से जुड़ी कथित घटना या डस्टबिन खरीद मामले से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।






















