पटना: भद्रघाट स्थित शिव मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण छठी समारोह के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
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श्रीकृष्ण छठी के अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
जन्माष्टमी के छठे दिन मनाई जाती है श्रीकृष्ण छठी

मंदिर के पुजारी कपिलदेव मिश्र ने बताया कि जन्माष्टमी के छठे दिन हर वर्ष श्रीकृष्ण छठी उत्सव मनाने की परंपरा है। इसी परंपरा के तहत भद्रघाट शिव मंदिर परिसर में भी श्रीकृष्ण छठी का आयोजन किया गया।
उन्होंने बताया कि छठी उत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का विशेष मंगल श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद आरती और पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंगल श्रृंगार और आरती के बाद छप्पन भोग

श्रीकृष्ण छठी समारोह के दौरान भगवान का मंगल श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। श्रृंगार के बाद मंदिर परिसर में आरती की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया।
आयोजन के दौरान भक्तों के लिए छप्पन भोग की भी व्यवस्था की गई। मंगल श्रृंगार और आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
भक्ति और आस्था में डूबा रहा मंदिर परिसर
श्रीकृष्ण छठी समारोह को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से माहौल भक्तिमय नजर आया। पूजा-अर्चना और आरती के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते नजर आए।
आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिली। मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों ने पूजा में हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया।
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हर वर्ष आयोजित होता है छठी उत्सव
पुजारी कपिलदेव मिश्र के अनुसार, जन्माष्टमी के बाद छठे दिन श्रीकृष्ण छठी मनाने की परंपरा के तहत यह आयोजन हर वर्ष किया जाता है। इस अवसर पर भगवान के मंगल श्रृंगार, आरती और छप्पन भोग की व्यवस्था की जाती है।
श्रीकृष्ण छठी समारोह के जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है। भद्रघाट शिव मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।






















