Ranjay Singh Murder Case Verdict, धनबाद: बहुचर्चित रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में शनिवार, 19 सितंबर 2026 को धनबाद की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने करीब नौ वर्षों तक चली सुनवाई के बाद मामले के आरोपी हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा को बरी कर दिया। अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका, जिसके बाद अदालत ने दोनों को राहत प्रदान की।
Highlights:
23 गवाहों की गवाही के बाद भी आरोप साबित नहीं
रंजय सिंह हत्याकांड की सुनवाई लगभग नौ वर्षों तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए कुल 23 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने सभी गवाहों का प्रति-परीक्षण किया। मामले में लंबी सुनवाई, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने 19 सितंबर को अपना निर्णय सुनाया। इससे पहले पांच सितंबर को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन अभियोजन की ओर से कानूनी बिंदुओं पर बहस के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के कारण निर्णय टाल दिया गया था।
29 जनवरी 2017 को गोली मारकर हुई थी हत्या
रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम करीब साढ़े पांच बजे धनबाद के बिग बाजार के सामने चाणक्य नगर मोड़ के पास गोली मारकर कर दी गई थी। घटना के समय रंजय सिंह को धनबाद के पूर्व मेयर संजीव सिंह का करीबी बताया जाता था। सरेआम हुई इस हत्या के बाद धनबाद में काफी हलचल मच गई थी। पुलिस की जांच के बाद नंदकुमार सिंह और हर्ष सिंह को मामले में आरोपी बनाया गया था।
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लंबे इंतजार के बाद आया अदालत का फैसला
मामले में करीब नौ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद शनिवार को फैसला सुनाया गया। अदालत के निर्णय के बाद दोनों आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, अदालत का फैसला अभियोजन द्वारा आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं किए जाने और संदेह का लाभ दिए जाने पर आधारित है। मामले में आरोपों के संबंध में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत के निर्णय में सामने आया है।
फैसले से पहले कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई थी सुरक्षा
रंजय सिंह हत्याकांड के फैसले को लेकर धनबाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। पुलिस-प्रशासन की ओर से किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। फैसले से पहले अदालत में दोनों पक्षों और मामले से जुड़े लोगों की निगाहें निर्णय पर टिकी थीं। अब अदालत के फैसले के बाद यह चर्चित मामला एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पर पहुंच गया है।























