कभी उद्योग की पहचान रहा हार्ड कोक कारोबार अब मुश्किल दौर में
Dhanbad Coke Industry Crisis, धनबाद: कोयलांचल की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला हार्ड कोक उद्योग इन दिनों कच्चे माल की उपलब्धता और बढ़ती लागत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। धनबाद इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन की 93वीं वार्षिक आम बैठक में उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। बैठक में उद्यमियों ने कहा कि कोयला नियमित रूप से और उचित कीमत पर उपलब्ध नहीं होने का असर हार्ड कोक इकाइयों की उत्पादन क्षमता पर पड़ा है। उनका दावा है कि धनबाद और आसपास के इलाकों में करीब 90 कोक इकाइयां बंद हो चुकी हैं या डिस्मेंटल की जा चुकी हैं।
Highlights:
90 इकाइयों के बंद होने का दावा, 40-42 के चलने की बात
एसोसिएशन से जुड़े उद्यमियों के अनुसार, एक समय धनबाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में हार्ड कोक इकाइयां संचालित होती थीं। अब इनमें से करीब 90 इकाइयों के बंद या डिस्मेंटल होने का दावा किया जा रहा है। उद्यमियों का कहना है कि फिलहाल केवल 40 से 42 इकाइयां किसी तरह उत्पादन जारी रख पा रही हैं। कारोबारियों के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियां कम होने का असर सीधे स्थानीय रोजगार पर भी पड़ा है। उनका दावा है कि इस संकट के कारण करीब 25 हजार मजदूरों के रोजगार प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करना पड़ा है।
हर महीने तीन लाख टन कोयले की जरूरत
एसोसिएशन के वरीय उपाध्यक्ष एसके सिन्हा के अनुसार हार्ड कोक उद्योग को उत्पादन के लिए हर महीने लगभग 3 लाख टन कोयले की आवश्यकता होती है। सालाना जरूरत करीब 36 लाख टन बताई गई है। उद्यमियों का कहना है कि लिंकेज के जरिए उनकी जरूरत के मुताबिक कोयला नहीं मिल पा रहा है। पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने से कई इकाइयों के सामने उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो रहा है। बैठक में कोयले की उपलब्धता के साथ उसकी कीमत और आपूर्ति की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई।
ई-ऑक्शन और परिवहन लागत को लेकर कारोबारियों की चिंता
उद्यमियों ने बताया कि 2019 के बाद कोयला आपूर्ति की व्यवस्था में बदलाव आया और ई-ऑक्शन पर निर्भरता बढ़ी। उनका कहना है कि नीलामी में कोयले की कीमत बढ़ने से छोटे और मध्यम उद्योगों की लागत पर दबाव बढ़ा है। रेलवे के जरिए कोयला मंगाने में भी MSME इकाइयों को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कारोबारियों के अनुसार, अधिकांश छोटी और मध्यम इकाइयों के पास अपनी निजी रेलवे साइडिंग नहीं है। ऐसे में कोयले की ढुलाई और आपूर्ति की व्यवस्था अतिरिक्त चुनौती बन जाती है।
कोयला आपूर्ति सुधारने की मांग
हार्ड कोक उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने सरकार, कोल इंडिया और BCCL से छोटे उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराने की स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है। उद्यमियों का कहना है कि यदि कोयला उचित कीमत पर नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए, तो बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा शुरू करने की संभावना बन सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी वापस आ सकते हैं। हालांकि, उद्योग से जुड़े ये आंकड़े और रोजगार पर असर के दावे एसोसिएशन के उद्यमियों की ओर से बैठक में रखे गए हैं। संबंधित सरकारी विभागों, कोल इंडिया या BCCL की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है।
समाधान नहीं हुआ तो चल रही इकाइयों पर भी दबाव
बैठक में उद्यमियों ने आशंका जताई कि अगर कोयले की कीमत और उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो वर्तमान में चल रही इकाइयों के सामने भी उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि हार्ड कोक उद्योग केवल औद्योगिक उत्पादन से जुड़ा क्षेत्र नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी जुड़े हैं। इसलिए कोयला आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार को उद्योग के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।






















