IIT ISM ICC National Conference: आईआईटी आईएसएम धनबाद में शुक्रवार को इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स (आईसीसी) के 45वें राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने रसायन विज्ञान के क्षेत्र में शोध, नई तकनीक और भारत की आत्मनिर्भरता से जुड़े विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के पूर्व निदेशक प्रो. जेएस यादव थे। वहीं, जेएनसीएएसआर, बेंगलुरु की मानद प्रोफेसर प्रो. हिरियाक्कनवर इला विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। मुख्य अतिथि प्रो. जेएस यादव ने वैज्ञानिकों से शोधपत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एप्लिकेशन आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता देनी चाहिए। वैज्ञानिक शोध का लाभ उद्योग, तकनीक और आम लोगों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना होगा।
Highlights:
क्रिटिकल मिनरल्स में आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत
प्रो. यादव ने कहा कि भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं, इसके बावजूद देश को इनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण संसाधनों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स के निष्कर्षण, पृथक्करण और प्रसंस्करण की स्वदेशी तकनीक विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तकनीकी क्षमता मजबूत होने से भारत को औद्योगिक और रणनीतिक स्तर पर लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही खनिजों के पुनर्चक्रण यानी रिसाइक्लिंग और रेडियोएक्टिव कचरे के सुरक्षित प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
युवा वैज्ञानिकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण जरूरी
विशिष्ट अतिथि प्रो. हिरियाक्कनवर इला ने युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए बेहतर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर और उन्नत सामग्री जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे देश में नई तकनीक विकसित करने की क्षमता बढ़ेगी और शोध के परिणामों को औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। आईसीसी के अध्यक्ष प्रो. रंजीत कुमार वर्मा ने रसायन विज्ञान में गुणवत्तापूर्ण शोध, वैज्ञानिक सहयोग और प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
आईआईटी आईएसएम की शोध विरासत का उल्लेख
आईआईटी आईएसएम के कार्यवाहक निदेशक प्रो. सरत कुमार दास ने संस्थान की सौ वर्षों की शोध विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संस्थान लंबे समय से विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान देता रहा है। राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी संस्थान के शताब्दी वर्ष समारोह का हिस्सा है। इस तरह के आयोजन वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को अपने विचार साझा करने तथा नए शोध क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर देते हैं।
एक नवंबर तक चलेगा सम्मेलन, क्रिटिकल मिनरल्स पर विशेष सिम्पोजियम
यह राष्ट्रीय सम्मेलन एक नवंबर तक चलेगा। इसमें क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता, नई तकनीकों और शोध को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। सम्मेलन के दौरान रसायन विज्ञान की चार प्रमुख शाखाओं में व्याख्यान, शोध प्रस्तुतियां और पोस्टर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ‘क्रिटिकल मिनरल्स एंड रेयर अर्थ्स: कैटेलिस्ट्स फॉर टेक्नोलॉजिकल एंड इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन टुवर्ड्स विकसित भारत’ विषय पर समानांतर सिम्पोजियम भी होगा। इसमें महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और सतत उपयोग से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को देश की तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना तथा भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई संभावनाएं तलाशना है।






















