नई दिल्ली(NEW DELHI): सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को चीन के मुद्दे पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि वह एक “सच्चे भारतीय” हैं, तो उन्हें इस प्रकार की बातें नहीं करनी चाहिए थीं।
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क्या है मामला?
राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान यह दावा किया था कि “चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है।” इसके बाद उनके खिलाफ सेना और राष्ट्रहित पर की गई कथित “गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी” को लेकर मानहानि का मामला दर्ज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा:
“आपको कैसे पता चला कि चीन ने जमीन हड़पी है? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ऐसा बयान नहीं देते। जब सीमा पर तनाव है, तब विपक्ष के नेता को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए।”
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी टिप्पणियों के बजाय राहुल गांधी संसद में सवाल क्यों नहीं उठाते।
राहत भी मिली राहुल गांधी को
- सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को इस मामले में आंशिक राहत देते हुए लखनऊ की ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन पर रोक लगा दी है।
- कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भले ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन उसका इस्तेमाल “राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना जैसे संवेदनशील मामलों” में सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी का तर्क
राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एक विपक्षी नेता के रूप में उन्हें नीतिगत मुद्दों पर सवाल उठाने का अधिकार है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि इसे लोकतंत्र की आलोचना के रूप में देखा जाए, न कि राष्ट्रविरोधी रवैये के रूप में।






















