नई दिल्ली:जीएसटी काउंसिल द्वारा हाल ही में आम लोगों से जुड़ी वस्तुओं और सेवाओं पर कर दरों में की गई कटौती को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि यह कदम डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्रभाव के चलते अंतरराष्ट्रीय दबाव में उठाया गया है।
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इन अटकलों का वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो टूक खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जीएसटी दरों में बदलाव का ट्रंप टैरिफ से कोई संबंध नहीं है। यह निर्णय पूरी तरह घरेलू समीक्षा और लंबे समय से जारी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।”क्या कहा वित्त मंत्री ने?
सीतारमण ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से लगातार जीएसटी ढांचे में सुधार पर काम किया जा रहा था। इसके लिए विभिन्न मंत्रियों के समूह बनाए गए थे — कोई बीमा क्षेत्र पर काम कर रहा था, कोई कर संरचना को संतुलित करने पर।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुआवजा उपकर को पहले ही यह तय किया जा चुका था कि जैसे ही कर्ज समाप्त होगा, इसे बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा:
“भारत की नीति हमेशा आत्मनिर्भरता और घरेलू उद्योगों को मजबूती देने पर केंद्रित रही है। यह निर्णय उपभोक्ताओं को राहत, उद्योग को प्रोत्साहन और कर संग्रह में दीर्घकालिक स्थिरता लाने की दृष्टि से लिया गया है।”
सरकार को कितना नुकसान?
जब पत्रकारों ने पूछा कि इस दर कटौती से सरकार को राजस्व में कितना घाटा होगा, तो सीतारमण ने कहा:
“लोग अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं। मैं इन बहसों में नहीं पड़ना चाहती। हमारे पास ठोस आंकड़े हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि इसका GDP पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।”
पीयूष गोयल का बयान: “ऐतिहासिक दिवाली तोहफा”
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे एक “ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सभी के लिए ऐतिहासिक दिवाली तोहफा।
जीएसटी में यह सुधार किसानों, छोटे-मंझोले उद्योगों, मध्यम वर्ग, महिलाओं और युवाओं को सीधे लाभ देगा।
यह बिजनेस करना आसान बनाएगा और उद्योगों के लिए नए अवसर खोलेगा।”
उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद ने इस सुधार को पूरी तरह समर्थन दिया है और यह “अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों” की शुरुआत है।





















